किन्नौर (एकता): कमजोर शरीर और लड़खड़ाते कदम, 106 साल की उम्र में कई शारीरिक तकलीफों के बावजूद हमेशा मतदान केंद्र पर जाकर अपना वोट डालने वाले श्याम सरन नेगी ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। मास्टर श्याम सरन नेगी आजाद भारत के पहले मतदाता थे। वोटिंग के प्रति उनके जज्बे के साथ उनके पहले वोटर बनने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है।

106 साल उम्र में मतदान के प्रति उनके अंदर इतना बड़ा जुनून था कि तीन दिन पहले ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए डाक मतपत्र के जरिए अपना वोट डाला था। आइए जानिए एक मास्टर के लोकतंत्र का हीरो बनने की कहानी।

1951 में पहली बार किया था मतदान
श्याम सरन नेगी राजधानी शिमला से लगभग 280 किलोमीटर दूर किन्नौर जिले के कल्पा गांव के रहने वाले थे। उन्होंने 1951 में पहली बार मतदान किया था। बता दें कि 1 जुलाई 1917 को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के चिन्नी गांव (अब कल्पा गांव) में श्याम सरण नेगी का जन्म हुआ था। वह स्वतंत्र भारत के पहले वोटर माने जाते हैं। भारत में पहले चुनाव के लिए 1950 में देशभर में वोट डाले गए थे। लेकिन तब की राज्य व्यवस्था में किन्नौर सहित ऊंचे हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों में 25 अक्टूबर 1951 में वोट डाले गए थे। उन्होंने अक्टूबर 1951 में पहली बार संसदीय चुनाव में अपना वोट डाला और तब से लेकर 2 नवंबर 2022 तक उन्होंने लगातार अपना मतदान किया। हैरानी की बात यह है कि नेगी ने अपने जीवन में 34 बार वोट डाला। इतना ही नहीं उन्होंने बैलेट पेपर से EVM का बदलाव भी देखा।

स्कूल में टीचर की नौकरी करते थे नेगी
1951 के दौरान श्याम सरन नेगी एक स्कूल में टीचर थे। उस वक्त कल्पा को चिन्नी गांव के नाम से जाना जाता था। 9वीं तक पढ़ाई करने वाले नेगी को उम्र ज्यादा होने की वजह से 10वीं में एडमिशन नहीं मिला था। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। नेगी ने 1940 से 1946 तक वन विभाग में गार्ड की नौकरी की। बाद में कल्पा लोअर मिडल स्कूल में टीचर की नौकरी की।

श्याम सरन नेगी ऐसे बने भारत के प्रथम वोटर
बता दें कि चुनाव के दौरान पड़ोस के गांव के स्कूल में श्याम सरन नेगी की ड्यूटी लगी थी। लेकिन उनका वोट अपने गांव कल्पा में था। लेकिन उनमें वोट डालने का इतना जुनून था कि वह मतदान से एक रात पहले ही अपने गांव आ गया। इतनी सर्दी में सुबह 4 बजे जल्दी उठकर वह सुबह 6 बजे पोलिंग बूथ पर पहुंचे लेकिन तब तक ना तो कोई वोटर पहुंचा और ना ही पोलिंग बूथ अधिकारी। थोड़ी देर बाद जब पोलिंग कराने वाला दल वहां पहुंचा तो उसने उनको कहा कि वह उन्हें जल्दी वोट डालने दें, क्योंकि मुझे 9 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में चुनाव कराने जाना है। पोलिंग अधिकारियों ने उनकी परेशानी समझी और आधा घंटा पहले सुबह 6:30 बजे वोट डालने दिया। इस तरह वह देश के प्रथम वोटर बने।

