बिलासपुर/सुभाष ठाकुर: आधुनिक सुविधाओ से लैस जिला बिलासपुर के दूसरा सबसे बड़े सिविल अस्पताल की इमारतें बड़ी है। बावजूद इसके अस्पताल में डॉक्टर की कमी साफतौर पर देखने को मिलती है। सिविल अस्पताल घुमारवीं पहले ही स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में तैनात दो विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्थानांतरण हो गया है। अस्पताल में न तो हड्डी रोग विशेषज्ञ है और न ही शिशु रोग विशेषज्ञ है और न ही सर्जन और एमडी मेडिसिन है। वही अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की सुविधाएं भी लोगो की नही मिल पा रही है। दूसरो की सेहत का ख्याल रखने वाला अस्पताल कई मुख्य चिकित्सक न होने के चलते खुद वेंटिलेटर पर है।
अस्पताल विशेषज्ञ न होने से मरीजो को जिला अस्पताल बिलासपुर या फिर हमीरपुर रेफर करना पड़ता है। क्षेत्र घुमारवीं की करीब 59 पंचायतों में 11 पीएचसी, चार सीएचसी और घुमारवीं में स्थित एक सिविल हॉस्पिटल है और हजारों की आबादी के लिए केवल घुमारवीं सिविल अस्पताल में यही मात्र दो विशेषज्ञ चिकित्सक थे। एक साथ इन दोनों विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थानांतरण से स्वास्थ्य सेवाएं अब और भी बदहाल होने का अंदेशा है। अस्पताल में चिकित्सकों के 10 पदों में से मात्र छह ही चिकित्सक मौजूद है। कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग के गृह क्षेत्र में इस तरह से स्वस्थ सेवाओं का चरमराना तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है तथा यह दर्शाता है कि सरकार लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति कितनी सचेत है।
