शिमला : कमल भारद्वाज ( TSN)-नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार के द्वारा घोषित किए विशेष आपदा पैकेज को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने केंद्र के द्वारा दी गई सहायता और स्वीकृत योजनाओं के पैसे को राहत पैकेज में समाहित कर लोगों को झांसा देने का प्रयास किया है। विपक्ष इसकी सच्चाई को जनता के बीच ले जाकर सरकार के झूठ को बेनकाब करेगी।
केंद्र के सहयोग को किया गया दरकिनार..प्रदेश सरकार कर रही पक्षपात
दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के बाद शिमला लौटने पर जयराम ठाकुर ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि विपक्ष ने आपदा में राजनीति को दरकिनार कर मदद की कोशिश की है, लेकिन सुखविंदर सुक्खू सरकार केंद्र के सहयोग को दरकिनार कर सरकार ने केंद्र के खिलाफ मुहिम चला रखी है। केंद्र सरकार अभी भी प्रदेश को मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में भी सरकार पक्षपात कर रही है। जहां से कांग्रेस को वोट नही मिले उन क्षेत्रों को अनदेखा किया जा रहा है। सरकार ने प्रदेश में आपदा के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। पैकेज में एक हजार करोड़ मनरेगा के पैसे की बात कही गई जो केंद्र से आता है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 6500 घर बना रही है, उसे भी सुक्खू सरकार ने पैकेज का हिस्सा बना दिया। एनडीआरएफ से जो मदद का पैसा मिला और आपदा राहत कोष में 225 करोड़ जो लोगों ने दिया उसे भी पैकेज में शामिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आपदा की घड़ी में सरकार ने लोगों को गुमराह करने की परंपरा की नई शुरुआत कर दी है। प्रदेश सरकार लोगों को मदद दे पा रही है तो उसमें केंद्र का बहुत बड़ा योगदान हैं।
अपने लोगों को फायदा देने के लिए सूचियां बनाई जा रही
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहत में ब्लॉक स्तर पर अपने लोगों को फायदा देने के लिए सूचियां बनाई जा रही है। ये राहत प्रभावितों को मिलनी चाहिए न कि दल विशेष के लोगों को। इससे बड़ा कोई पाप नही होगा। इस तरह की धांधली करने वाले कोताही बरतने वाले अधिकारी बचेंगे। उन्होंने कहा कि दस महीने की सरकार धांधलियों के चलते बदनाम हो गई है। वहीं प्रदेश में बढ़े सीमेंट के दाम को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि दस महीने में चार बार सीमेंट के दाम बढ़ गए हैं। कांग्रेस विपक्ष में रहते सीमेंट के दाम को लेकर हल्ला करती थी, लेकिन अब दामों में लगातार वृद्धि की जा रही है सरकार इस पर लगाम लगाने में नाकाम हैं।
