भावना: देश सहित प्रदेश भर में आज हनुमान जयंती का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जा रहा हैं। इसे खास दिन पर भगवान हनुमान के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है तो वहीं कई तरह के आयोजन भी मंदिरों में इस खास दिन पर किए जा रहे हैं। देशभर में हनुमान जी के कई मंदिर स्थापित है और उनसे जुड़ी हुई कई मान्यताएं और ऐतिहासिक घटनाएं हैं। वहीं देव भूमि हिमाचल भी राम भक्त हनुमान जी के पावन चरणों से पवित्र हुई हैं। यहां भी भगवान हनुमान के कई मंदिर स्थापित हैं और उन्हीं में से एक प्रसिद्ध मंदिर है राजधानी शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित जाखू मंदिर हैं। इस ऊंची चोटी पर भगवान हनुमान जी स्वयं स्वयंभू मूर्ति के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए हुए हैं।
यह मंदिर काफी प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं। स्थानीय लोगों के साथ ही शिमला आने वाले पर्यटक भी इस मंदिर में आना नहीं भूलते हैं। मान्यता है कि मंदिर में साक्षात हनुमान जी का वास है और सच्चे दिल से यहां जो भी मन्नत मांगी जाती है,बजरंगबली उसे पूरा करते हैं। यही वजह भी हैं की इस प्रसिद्ध मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं। जाखू मंदिर है यहां के इतिहास के साथ ही अपनी प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर भी विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।
रामायण काल से जुड़ा है जाखू मंदिर का इतिहास
शिमला में 8048 फिट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध जाखू मंदिर का इतिहास त्रेता युग में रामायण काल से जुड़ा हुआ हैं। आ जाता है कि जिस जगह पर यह मंदिर स्थित है वहां भगवान हनुमान जी का साक्षात वास है और भगवान हनुमान जी खुद इस स्थान पर आए थे। कहा जाता है कि जब रावण से युद्ध के दौरान हैं मेघनाथ के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तो उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी की आवश्यकता थी जिसे लाने का कार्य भगवान श्रीराम की ओर से अपने परम भक्त हनुमान जी को सौंपा गया था। प्रभु श्रीराम के आदेश को पूरा करने के लिए हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत की तरफ जा रहे थे तो उन्होंने जाखू नामक इसी स्थान पर विश्राम किया था। यहां स्थान पर भगवान हनुमान जी ने भगवान राम की तपस्या में लीन यक्ष ऋषि से संजीवनी बूटी के बारे में जानकारी ली और आगे का रास्ता भी पूछा था। इसके बाद है हनुमान जी यहां से आगे संजीवनी बूटी लाने के लिए रवाना हुए। हनुमान जी ने वापसी में इसी स्थान पर यक्ष ऋषि को मिलने का वादा भी किया था,लेकिन समय की कमी के कारण वह वापिस जाखू पर्वत पर नहीं आ पाए और छोटे मार्ग से ही वापस चले गए।
वहीं यक्ष ऋषि उसी स्थान पर भगवान हनुमान जी का इंतजार कर रहे थे लेकिन उनके वापस ना आने से वह व्याकुल हो थ जिसके बाद भगवान हनुमान जी ने उन्हें एक पत्थर के रूप में दर्शन दिए अरे आज भी यहां स्वयंभू मूर्ति जाखू मंदिर में भगवान हनुमान जी के स्वरूप के रूप में विराजमान हैं। इतना ही नहीं आज भी स्थान पर भगवान हनुमान जी के चरणों के निशान मौजूद हैं जिन्हें मंदिर में सहेज कर रखा गया है और यहां आने वाले श्रद्धालु आज भी उनके चरणों के दर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
ऋषि यक्ष के नाम पर ही पड़ा हैं जाखू नाम
जिस पर्वत पर भगवान हनुमान जी का यह मंदिर स्थित है उसे स्थल का नाम भी ऋषि यक्ष के नाम पर ही पड़ा हैं। इस स्थान का नाम पहले याकू और फिर जाखू पड़ा और अब विश्व भर में इस स्थल और इस मंदिर की पहचान है जाखू मंदिर के रूप में ही हैं।
मंदिर में प्रतिदिन होती हैं दो पहर की आरती
सुबह सात बजे मंदिर के द्वार खुलने के बाद हनुमान जी का श्रृंगार होता है और इसके बाद हनुमान जी की आरती की जाती हैं। इसके बाद शाम को सुर्यास्त होने के बाद आरती की जाती हैं। जाखू मंदिर की आरती की खास बात ये है कि यहां आरती में केवल घंटियां और नगाड़े बजाए जाते हैं।मंदिर में हर रविवार और ज्येष्ठ मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया जाता हैं।
मंदिर परिसर में लगी 108 फीट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति है आकर्षण का केंद्र
मंदिर परिसर में लगी विश्व की सर्वाधिक ऊंची हनुमान जी की मूर्ति मंदिर के मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं। यह मूर्ति 108 फुट ऊंची है, जिसे बॉलीबुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता नंदा के ससुराल वालों ने स्थापित किया हैं। यह मूर्ति शिमला के दूरदराज के क्षेत्रों से भी दिखाई देती है। जाखू मंदिर परिसर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, मंदिर परिसर में देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़ है, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
