हिमाचल : चन्द्रिका -जिला सिरमौर के नाहन में स्थित रेणुका झील एक ओर जहां धार्मिक स्थान है, वहीं ये पर्यटकों के लिए भी मनमोहक जगह है। रेणुका झील ऐतिहासिक जगह है जो भगवान परशुराम और उनकी माता रेणुका जी से जुड़ी है।
रेणुका झील नाहन से लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित है, जो हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। 672 मीटर की लंबाई के साथ, रेणुका झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी झील के रूप में जानी जाती है। इस झील का अपना एक सौंदर्य हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां हर साल हिंदू कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक मास में भगवान परशुरामजी अपनी माता रेणुका से मिलने आते हैं। माता और पुत्र के मिलाप को यहां के स्थानीय और आस-पास के निवासी बहुत ही उत्साह से त्योहार के रूप में मनाते हैं। इस मंदिर के आस-पास कार्तिक शुक्ल दशमी से पूर्णिमा तिथि के बीच मेले का आयोजन होता है। माना जाता है कि भगवान परशुराम जामूकोटी से माता से मिलने यहां आते हैं। यहां पर रेणुका झील भी है जहां माता रेणुका के साथ ही भगवान परशुरामजी का भी भव्य मंदिर है।
झील का आकार मां रेणुका जी की प्रतिछाया मानी जाती
रेणुका झील का आकार भी किसी सोई हुई महिला की तरह है। इसे मां रेणुका जी की प्रतिछाया भी माना जाता है। कहा जाता है कि कई बार वैज्ञानिकों ने इस झील की गहराई को मापने की कोशिश की,मगर वे इस काम में सफल नहीं हो सके। यहां यह भी मान्यता है कि जब भी कोई व्यक्ति झील को तैरकर पार करने की कोशिश करता है, तो वह बीच में ही डूब जाता है। इसी झील के किनारे मां श्रीरेणुकाजी व भगवान परशुरामजी के भव्य मंदिर हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के लोगों की इसमें अटूट श्रद्धा है।
यहां एक छोटा-सा चिड़ियाघर भी है
यहां एक छोटा-सा चिड़ियाघर भी है और 400 हेक्टेयर में फैला एक अभयारण्य भी है, जिसमें तरह-तरह की जड़ी-बूटियां तो हैं ही, चीतल, सांभर आदि जीव भी हैं। इन सबमें में पर्यटकों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय है रेणुका झील, जो हिमाचल की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील भी कहलाती है।
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