कुल्लू/मनमिन्द्र अरोड़ा: चालीस वर्ष के राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव देखें हैं। चुनाव जीते भी और हारे भी। हार से कभी हताश नहीं हुए हैं बल्कि हार के बाद जीत के गुर सीखें हैं। यह बात महेश्वर सिंह ने कुल्लू में नामांकन पत्र भरने के बाद कहे। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर यहां एसडीएम कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। उन्होंने कहा कि गत चुनाव को हार कर भी मजा आया। केंद्र में मोदी की सरकार व हिमाचल में जयराम की सरकार होने के कारण अथाह विकास कार्य करने का मौका मिला और बड़ी-बड़ी योजनाएं लाने में वे कामयाब रहे। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी खुशी की बात है कि इस बार के दशहरा पर्व में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए और उन्होंने मुझसे पूछा की क्या कमी है। मैंने मांग रखी है कि भूभु जोत टनल की कमी है और मणिकर्ण डबल लेन की कमी है। उन्होंने इन योजनाओं को सहर्ष ही स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि प्रदेश में जयराम की सरकार बनेगी और यहां से वे भारी मतों से जीतेंगे।

29 अक्टूबर के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
टिकट न मिलने के कारण विरोधी स्वरों के बारे में उन्होंने कहा कि स्वाभाविक तौर पर जिन्हें टिकट नहीं मिलता उनमें आक्रोश होता है। उन्होंने कहा कि 29 अक्टूबर के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और सभी को मनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले महेश्वर सिंह दो बार बंजार विधायक एक बार कुल्लू के विधायक, दो बार लोकसभा सांसद व एक बार राज्य सभा सांसद भी रहे हैं। यही नहीं महेश्वर सिंह एक बार शिक्षा मंत्रालय में सीपीएस भी रहे हैं। एक समय ऐसा भी आया था कि महेश्वर सिंह को पार्टी छोड़कर अपना दल हिलोपा खड़ा करना पड़ा था और वे धूमल सरकार को सत्ता से बाहर करने में कामयाब हुए थे। हालांकि इस बार वे सिर्फ अपनी सीट ही जीत पाए थे लेकिन हर विधानसभा में भाजपा का वोट बैंक काटने में कामयाब रहे थे। बाद में महेश्वर सिंह को भाजपा में शामिल किया गया और पिछली बार उन्हे कुल्लू सदर से टिकट मिला लेकिन वे कांग्रेस के सुंदर ठाकुर से हार गए थे। इस बार फिर से भाजपा ने महेश्वर सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है।
