अरविंदर सिंह,हमीरपुर(TSN): जापानी तकनीक से हिमाचल में अब शिटाके मशरूम उगाया जाएगा। यह मशरूम न सिर्फ खाने के काम आएगा बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी से लोगों को बचाने में भी रामबाण साबित होगा। इस मशरूम को निचले हिमाचल में उगने का काम अलग-अलग जिलों में किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना जायका प्रोजेक्ट (चरण-II) में इस मशरूम के उत्पादन को शामिल किया गया हैं।
जायका प्रोजेक्ट के प्रदेश निदेशक सुनील चौहान ने बताया कि प्रोजेक्ट के पहले चरण में जापानी तकनीक से शिटाके मशरूम को प्रदेश में तैयार करने से संबंधित कार्य किया गया था और अब द्वितीय चरण में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में शिटाके मशरूम को निकले हिमाचली जलवायु में तैयार किया जा रहा हैं। उन्होंने बताया कि इससे अब निकले हिमाचल के किसानों को भी लाभ पहुंचेगा।
बता दें कि शिटाके मशरूम आज लोकप्रिय मशरूम के रूप में जाना जाता हैं जिसका मूल स्थान (Origin) पूर्वी एशियाई देश हैं। शिटाक का उपयोग कई एशियाई देशों में खाद्य और औषधीय गुणों के लिए किया जाता हैं। भारत में शिटाके मशरूम स्वदेशी तकनीक से विभिन्न केंद्रों की ओर तैयार की जाती हैं। प्रदेश में शिटाके मशरूम की खेती के लिए बीज (Spawn ) खुम्ब अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DMR), चंबाघाट, सोलन से लिया जाता हैं।
शिटाके मशरूम में पाए जाने वाल लॅटीनन (बायोएक्टिव कंपाउंड) को कई एंटी-टयूमर और कैंसररोधी औषधियों में प्रयोग किया जाता हैं। शिटाके मशरूम का प्रोस्टेट व ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता हैं। इसका उपयोग बहुत से रोगों के लिए औषधि के रूप में जैसे की एड्स, एलर्जी, संक्रमण, फ्लू और जुकाम, ब्रोन्कियल सूजन ओर मूत्र असंयम को विनियमित करने के साथ-साथ उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता हैं। यह एंटी एजिंग के गुण के साथ-साथ विटामिन डी का भी काफी अच्छा स्रोत होता हैं। इसके नियमित सेवन से इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाया जा सकता हैं। इसमें सेलेनियम और जिंक की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है जिसकी वजह से इस मशरूम का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने के लिए किया जाता हैं।
जायका के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुनील चौहान ने बताया कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना 2011 से चली हैं और दूसरे चरण की शुरूआत वर्ष 2021 में कर दी गई है। इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग ने पालमपुर में पाटस कॉरपोरेशन जापान के सहयोग से 5.9 करोड़ रुपये की लागत के साथ शिटाके खेती और प्रशिक्षण केंद्र (SCTC) की स्थापना कर प्रशिक्षित अधिकारियों की ओर स्थानीय वातावरण के अनुरूप शिटाके मशरूम का उत्पादन करने की विधि किसानों को सिखाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मण्डी, कुल्लू, कांगडा आदि में यह मशरूम साधारण रूप से ओर अन्य क्षेत्रों में कन्ट्रोल स्ट्रक्चर में पैदा की जा सकती हैं।
जायका के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुनील चौहान ने बताया कि शिटाके मशरूम की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद हैं। यह मशरूम कैंसर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को दूर करने में काफी मददगार साबित होता हैं। इसकी खेती पर ज्यादा जोर दिया जा रहा हैं हिमाचल में इसके लिए जलवायु बहुत उपयुक्त हैं। हिमाचल के किसान भी अच्छे लाभ के लिए ताजा शिटाके मशरूम के साथ-साथ सुखाए मशरूम के बेहतर मौके हासिल कर सकते हैं।
