कुल्लू : मनमिंदर अरोड़ा (TSN)- हिमाचल प्रदेश में सरकार के द्वारा राजस्व अधिनियम में जो संशोधन किया गया है। उससे ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रहे पटवारी व कानूनगो को खासी दिक्कत का सामना करना होगा। ऐसे अब ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ ने प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा और मांग रखी है कि इस संशोधन में यह भी बताया जाए जाए कि एक माह के भीतर पटवारी व कानूनगो को कौन कौन से काम करने हैं ताकि जनता को भी दिक्कतों का सामना ना करना पड़ा है। इस मुद्दे को लेकर ढालपुर में संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ जिला कुल्लू की एक बैठक आयोजित की गई। वही, प्रदेश सरकार से मांग रखी गई कि जो संशोधन उनके द्वारा किया गया है। उसमें कुछ और चीजें भी जोड़ी जानी चाहिए।
प्रदेश सरकार से रखी कानून में बदलाव करने की मांग
संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के प्रदेश प्रेस सचिव युवराज नेगी का कहना है कि अब सरकार को धरातल पर आवश्यक सुधार भी करने होंगे। ताकि जनता के काम सही समय पर पूरा हो सके। आज पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर के 25 से 70% पद खाली चल रहे हैं। पटवारी और कानूनगो को अपने राजस्व संबंधी कार्य को पूरा करने का भी समय नहीं मिल पाता है। हर रोज पटवारी व कानूनगो के पास विभिन्न प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट, विभिन्न सूचना भेजना और परियोजना संबंधी जैसे काम भी करने होते हैं। लेकिन सरकार के द्वारा अब राजस्व अधिनियम संशोधन किया गया है कि यह सब काम एक तय समय सीमा के भीतर करने होंगे। काम करने के लिए किसी भी कर्मचारी को दिक्कत नहीं है। लेकिन इतने में कम समय में यह सब काम पूरा करना इतने कम कर्मचारियों के लिए तर्कसंगत रही है।
जिला कुल्लू संयुक्त पटवारी एवम कानूनगो महासंघ के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने बताया कि अब सरकार को यह बताना चाहिए कि एक पटवारी और कानूनगो को एक माह में कौन-कौन से काम कर रह करने होंगे। इसके अलावा एक बार राज्य कार्यकारिणी के साथ भी इस संशोधन नियमों को लेकर सरकार के द्वारा वार्ता करनी चाहिए। एकतरफा निर्णय लेने से सभी पटवारी व कानून को मैं भी रोष है। अब प्रदेश सरकार को इस बार ज्ञापन भेजा गया है और राजस्व अधिनियम संशोधन की भी महासंघ के द्वारा मांग रखी गई है।
