चन्द्रिका – हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है । यहां कई ऐसे स्थल है जो देवी देवताओं के नाम से जाने जाते है । जिला सोलन, तहसील कसौली क्षेत्र का एक एसा ही गांव मां चंडी के नाम से प्रसिद्ध है ।जी हां ये गांव चंडी है, जिसका नाम सुनते ही यहां के प्रसिद्ध मां चंडी देवी का नक्शा हमारे मानस पटल पर उभर जाता है ।
किसान को हुआ था स्वप्न में मां काली का साक्षात्कार
चंडी गांव का नामकरण भी मां चंडी देवी के नाम पर ही हुआ है ।यह पवित्र स्थल सोलन से 45 किलोमीटर, सुबाथु से 21 किलोमीटर, कुनिहार से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । पौराणिक गाथाओं के आधार पर ही मां चंडी इस गांव में पिंडी रूप में प्रकट हुई थी। कहते हैं कि एक स्थानीय किसान जब खेत जोत रहा था, तो उसके हल के अगले नुकीले हिस्से, जिससे हम खेत की बुआई करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में फाली कहते हैं। उस में खून लगा देखकर वह किसान अचंभित हो गया। तब उसने अपनी नजर इधर-उधर खेत में घुमाई और उसने पाया कि यह खून एक पत्थरनुमा पिंडी के ऊपरी हिस्से से बह रहा था। वह यह दैविक दृश्य देखकर आर्श्चयचकित हुआ, उसके बाद उसने घर एवं गांव के लोगों के साथ इस घटना के बारे में चर्चा की। इस घटना के उपरांत एक रात उस किसान को स्वप्न में मां काली का साक्षात्कार हुआ, मां ने उसे कहा कि मुझे पिंडी रूप मे स्थापित कर उसकी पूूजा करे। इससे उसके एवं सारे क्षेत्र का भला होगा। इस स्वप्न के बाद गांव के लोगों ने उस पत्थरनुमा पिंडी को चौकी बनाकर स्थापित कर दिया। कहते हैं कि मां चंडी देवी का मंदिर पट्टा महलोग रियासत के भवानी सिंह ने 1910 में बनवाया था।
हर साल यहां लगता है चंडी मेला
चंडी गांव में हर साल चंडी मेले का आयोजन भी किया जाता है ।यह मेला आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा मेला है। इसे चंडी की जातर के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर मंदिर को भव्य तरिके से सजाया जाता है । इस मेले में धार्मिक व संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । मां चंडी देवी स्थानीय क्षेत्र के लोगों की कुल देवी भी है, जिससे लोगों की मां चंडी के प्रति अगाध श्रद्धा एवं अटूट आस्था है ।
