धर्मशाला। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा की है। यह कदम राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और ट्रैकिंग व एडवेंचर गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है। हिमाचल सरकार अब केंद्रीय स्तर पर प्रस्ताव भेजेगी, जिसके बाद स्वीकृति मिलने पर बजट जारी किया जाएगा। चुनिंदा ट्रैक को विकसित कर ट्रैकिंग, हाइकिंग और माउंटेन बाइकिंग के लिए तैयार किया जाएगा।
माउंटेन ट्रेल क्या है?
माउंटेन ट्रेल एक संकरा, कच्चा रास्ता या पगडंडी होती है जो पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से पैदल यात्रा, ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग या घुड़सवारी के लिए किया जाता है। यह ट्रेल पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक अनुभव प्रदान करती है, जो सीधे पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों से होकर गुजरती है।
हिमाचल का सबसे लंबा ट्रैक
राज्य का सबसे लंबा ट्रैक पिन-पार्वती घाटी में स्थित है। 110 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक मणिकर्ण से शुरू होकर लाहुल घाटी तक जाता है। इस मार्ग में पार्वती दर्रा सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है, जिसकी ऊंचाई 5400 मीटर तक है।
धौलाधार रेंज में ट्रैकिंग रूट
कांगड़ा जिले की धौलाधार रेंज में कुल 17 ट्रैकिंग रूट हैं। इनमें से पांच उच्च जोखिम वाले, तीन कम जोखिम वाले और नौ सरल ट्रैकिंग रूट हैं। आसान ट्रैकिंग रूट में नड्डी-करेरी वाया रावा (1 दिन), सतोवरी घेरा-करेरी (1 दिन), बिलिंग-राजगुंधा-लोहारड़ी-ज्वारा (2-3 दिन) शामिल हैं।
जोखिम भरे ट्रैक
जोखिम भरे ट्रैक में टंग-नरवाणा, खेतल-अलूड, जिया-सूपधार-तालंग लेक, राजगुंधा-थमसर-बड़ा भंगाल और सेवन लेक धौलाधार रेंज शामिल हैं। इन ट्रैक पर अनुभव और सावधानी दोनों आवश्यक है। इस पहल से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को नया impulso मिलेगा और राज्य का एडवेंचर टूरिज़्म भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
