संजु चौधरी, शिमला: हिमाचल की सुखविंदर सरकार ने निराश्रितों के लिए सुखाश्रय कोष योजना शुरू की हैं। इस योजना के तहत निराश्रितों के लिए सरकार ने 101 करोड़ का सुखाश्रय फंड स्थापित किया हैं। सरकार के साथ ही समाज के अन्य वर्ग भी सुखविंदर सरकार की इस योजना में अपना सहयोग दे रहे हैं। वहीं नगर निगम के कांगनाधार से कांग्रेस पार्षद राम रतन वर्मा ने अपना पूरा मानदेय सुखाश्रय कोष में देने का एलान कर दिया हैं।
सोमवार को राम रतन वर्मा नगर निगम कार्यालय पहुंचे। जहां पर महापौर सुरेंद्र चौहान को पत्र लिखकर अपना मानदेय ना लेने की बात कही और इस मानदेय को सीधे सुखाश्रय कोष में देने का आग्रह किया। इस से पहले नगर निगम के महापौर और उपमहापौर ने भी अपने 1 माह का मानदेय सुखाश्रय कोष में दे चुके हैं। वहीं अन्य पार्षद भी इस कोष में अपना सहयोग दे रहे हैं।
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि पार्षद राम रतन वर्मा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सुखाश्रय योजना से काफी प्रभावित हैं ओर इन्होंने अपना पूरा मानदेय सुखाश्रेय कोष में देने की बात कही हैं। पार्षदों को सात हजार हर माह मानदेय बनता हैं,जोकि 5 साल का मानदेय 4 लाख पच्चीस हजार के करीब बनता हैं। इसके अलावा अन्य पार्षदों ने भी अपना एक माह का मानदेय सुखाश्रय कोष में दिया हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने निराश्रितों के लिए सुखाश्रय योजना शुरू की है और इस पुनीत कार्य के लिए सभी को आगे आना चाहिए और अपना सहयोग देना चाहिए। वहीं पार्षद राम रतन वर्मा ने कहा की मुख्यमंत्री ने सुखाश्रय योजना चलाई है इससे प्रभावित होकर उन्होंने अपना सारा मानदेय सुखाश्रय कोष में देने के लिए महापौर को पत्र लिखा हैं। मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज दिया है ओर जब तक वे पार्षद रहेंगे एक भी रुपए नहीं लेंगे। सारा मानदेय सुखाश्रय में देने के लिए उन्होंने पत्र दे दिया हैं। उन्होंने कहा कि ये योजना अनाथ बच्चों के लिए चलाई गई हैं ऐसे में समाज के सभी लोगों का भी दायित्व बनता हैं कि सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए । ऐसे बच्चों के पालन पोषण में काफी मुश्किलें आती हैं। यह पैसा इन बच्चों के काम आएगा ।
