राकेश, ऊना(TSN): आज के दौर में युवा सरकारी नौकरी या निजी क्षेत्र में बेहतरीन रोजगार पाने के लिए दौड़ भाग कर रहे हैं बेहतर रोजगार न मिलने की वजह से देश और प्रदेश भर में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है लेकिन इसी बीच जो कुछ हुआ ऐसे भी हैं जो सरकारी नौकरी या निजी क्षेत्र में रोजगार के पीछे भागने को प्राथमिकता ना देकर खेतीबाड़ी कर ही बेहतरीन भविष्य की नींव रख रहे हैं।
जिला ऊना के आदर्श नगर अंब के रहने वाले मुश्ताक गुज्जर ने खेतीबाड़ी को ही अपने व्यवसाए के रूप में चुना हैं लेकिन मुश्ताक गुज्जर ने गेहूं, मक्की, धान की परंपरागत खेती करने के बावजूद ड्रैगन फ्रूट की खेती करने में अपनी रूचि दिखाई और वर्तमान में कड़ी मेहनत करके ड्रैगन फ्रूट से लाखों रूपये की कमाई कर रहे हैं। मुश्ताक़ ड्रैगन फ्रूट की खेती कर दूसरें किसानों के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं।
मेहनतकश किसान मुश्ताक गुज्जर इस वर्ष ड्रैगन फ्रूट के लगभग 1300 पौधों से लगभग दो टन तक डैगन फल की पैदावार निकाली है जिससे उन्हें काफी लाभ मिला हैं। मुश्ताक बताते हैं कि ड्रैगन फल की मार्किट में बहुत अधिक मांग है और यह फल काफी ऊंचे दामों पर बिकता हैं। ड्रैगन फ्रूट में मानव शरीर के लिए जरूरी पौषक तत्व जैसे एंटीऑक्सिडेंट, एंटीएजिंग, पोटाश व कैल्शियम भरपूर मात्रा में होते हैं। ड्रैगन फ्रूट दिल के मरीजों के लिए यह फल वरदान हैं। खाने में यह फल स्ट्रॉबैरी व लीची जैसे मीठा स्वाद देता हैं। यह फल जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्यवर्धक भी हैं।
मानव शरीर में ड्रैगन फ्रूट एक दवा का काम करता हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती में मुश्ताक का परिवार भी भरपूर साथ देता हैं। यही कारण है कि उनकी सफलता की कहानी क्षेत्र के अन्य लोगों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुश्ताक गुज्जर के पिता शौकत अली गुज्जर बताते है की वर्ष 2019 के मार्च माह में सीमेंट के पोल बनाकर 500 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए थे। सितंबर से अक्तूबर माह में फूल से फल तैयार होने में 40 दिन का समय लगता हैं। ड्रैगन फ्रूट के पौधे का औसतन जीवन 25-30 वर्ष होता हैं। ऐसे में किसान को एक ही बार निवेश करना होता हैं। उन्होंने बताया कि एक पोल पर पेड़ को तैयार करने के लिए तकरीबन सभी खर्च मिलाकर 1,000 रूपये का खर्च आता हैं। उन्होंने युवा किसानों से कहा कि परंपरागत खेती के साथ-साथ कुछ नया किया जाए तो उससे भी कमाई की जा सकती हैं।
वर्तमान में मुश्ताक गुज्जर 5 हज़ार ड्रैगन पौधों की कर रहे देखभाल
मुश्ताक गुज्जर बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2019 में लगभग 500 ड्रैगन फ्रूट के पौधों से शुरूआत की थी। वर्तमान में मुश्ताक गुज्जर दो हाइब्रिड और एक ट्रेडिशनल ड्रैगन फ्रूट के लगभग 5,000 पौधों की खेती कर रहे हैं जिसमें अमेरिकन ब्यूटी, रेड सिमन, रेड रॉयल व वियतनामी किस्म के ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं। इस वर्ष लगभग 1300 ड्रैगन फ्रूट के पौधों से लगभग दो क्विंटल ड्रैगन फ्रूट की पैदावार की है, जिसे उन्होंने 250 से 300 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मार्किट में बेचा हैं।
मुश्ताक ने 3.5 एकड भूमि पर तैयार की ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी
मुश्ताक ने ड्रैगन फ्रूट को स्थानीय बाजार के अलावा जिला बिलासपुर व हमीरपुर सहित अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे चंडीगढ़ व जालंधर में भी बेचते हैं जिससे उन्हें काफी अच्छे दाम मिलते हैं। इसके अतिरिक्त वर्तमान में उन्होंने तीन व्यक्तियों को स्थाई रोजगार भी दे रखा हैं।
बागवानी विभाग का मिल रहा सहयोग
मुश्ताक गुज्जर को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए बागवानी विभाग का भरपूर सहयोग मिला रहा हैं। विभाग की ओर से उन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई योजना 80 प्रतिशत अनुदान पर प्रदान किया गया हैं। इसके अतिरिक्त बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर आकर तकनीकी सहायता भी देते हैं। उद्यान विभाग के अधिकारी समय-समय पर ड्रैगन फ्रूट के पौधों के पोषण हेतू प्राथमिक न्यूट्रिशन ओट पौधे में लगने वाली बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं के बारे में जानकारी मुहैया करवाते रहते हैं जिससे उन्हें काफी मदद मिलती हैं।
मुश्ताक गुज्जर ने उपायुक्त राघव शर्मा का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस ड्रैगन की फसल को सफल बनाने के लिए काफी भरसक प्रयास किए हैं। उनके दिशा-निर्देशानुसार समय-समय पर ड्रैगन फ्रूट की खेती पर सेमीनार आयोजित किए गए जिससे खेती करने में काफी मदद मिली हैं। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के प्रयासों से ही ड्रैगन फ्रूट की खेती को किसान क्रेडिट लिमिट में जोड़ा गया हैं। उन्होंने बताया कि साढे़ छः लाख प्रति एक्ड़ के हिसाब से इस फसल की केसीसी लिमिट बनाई जा रही हैं। उन्होंने उपायुक्त राघव शर्मा की ओर से किसानों को लाभांवित करने के लिए की गई इस पहल की काफी सराहना की हैं।
