अरविंदर सिंह,हमीरपुर: आज के समय में जब फसलों पर फलों और सब्जियों पर सबसे अधिक का रसायनिक खादों और कीटनाशकों का उपयोग अच्छी फसल पाने के लिए किसान कर रहे हैं तो वही इसके विपरीत कुछ किसान ऐसे हैं जो प्रकृति का खेती अपनाकर अपने खेतों में रसायनिक खादों और ज़हरीले कीटनाशकों का प्रयोग ना करते हुए सुरक्षित एवं जहर मुक्त अनाज उगा कर अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे हैं। प्राकृतिक खेती में बेहतर फसल उगा कर बेहतर मुनाफ़ा कमाने का एक उदाहरण हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल के गांव रैल के मुनी लाल ने पेश किया हैं।
मुनी लाल ने कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं प्राप्त करके अपनी कुल 12 कनाल जमीन पर पूरी तरह प्राकृतिक खेती करते हुए एक साथ कई फसलें उगाकर कमाल कर दिखाया हैं। बीएसएनएल से रिटायर होने के बाद पूरी तरह प्राकृतिक खेती को समर्पित मुनी लाल के खेतों में आजकल मक्की, गन्ना, कोदरा, रागी, हल्दी, अदरक, मूंगफली, सोयाबीन, जिम्मी कंद और अन्य फसलें लहलहा रही हैं।
मुनी लाल ने बताया कि उनके उच्च शिक्षा प्राप्त दोनों बेटे एवं बहुएं बंगलूरू और गुरूग्राम में कार्यरत हैं और घर में वह अपनी पत्नी कुंता देवी के साथ प्राकृतिक खेती में व्यस्त रहते हैं। मुन्नी लाल ने बताया कि आज के दौर में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद लोगों में गंभीर बीमारियां बढ़ती ही जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण हमारे आहार में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के जरिये जहरीले पदार्थों का घुलना ही हैं। इसलिए, उन्होंने अपनी 12 कनाल जमीन पर प्राकृतिक खेती से फसलें उगाने का निश्चय किया और इसमें कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से उन्हें बहुत ज्यादा मदद मिली।
मुनी लाल ने बताया कि उन्होंने परियोजना के माध्यम से सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब वह प्राकृतिक खेती के लिए घर में ही जीवामृत और अन्य सामग्री तैयार करते हैं। खेतों की बाड़बंदी, बीज, बोरवैल और अन्य सुविधाओं के लिए उन्हें आतमा परियोजना के तहत सब्सिडी भी मिली। मुनी लाल ने बताया कि वह पारंपरिक फसलों के साथ-साथ प्रयोग के तौर पर कई अन्य नकदी फसलें भी उगा रहे हैं और उनके ये प्रयोग काफी सफल हो रहे हैं। पिछले सीजन में उन्होंने विभिन्न फसलों के अलावा लगभग 12 क्विंटल हल्दी की पैदावार की और एक क्विंटल से अधिक शक्कर तैयार की। इस बार उन्होंने मूंगफली, दाल चीनी, स्टीविया और अन्य पौधे भी लगाए हैं।
