सोलन/योगेश शर्मा– डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में सोमवार से तीन दिवसीय हिमसंवाद- ट्रांस हिमालयन स्थानीय समाधान और कार्यान्वयन रणनीति पर सम्मेलन शुरू हुआ। जिसका उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। यह कार्यक्रम नौणी विवि, सेवा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में हिमालयी देशों भूटान और नेपाल और भारत के हिमालय क्षेत्र में स्तिथ राज्यों के 200 से अधिक नीति निर्माता, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता तीन दिनों तक हिमालय क्षेत्र के सतत विकास पर विचार-विमर्श करेंगे। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि हम विचार लेकर इस महामंथन में आए है कि जो हमारे हिमालयन क्षेत्र होते है, उनके अपने प्रश्न उनकी अपनी समस्या होती है। ऐसे में इनकी समस्या का निवारण भी इनके साथ बैठकर ही होगा। राज्यपाल ने कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या भूस्खलन है । उसका आजतक कोई भी समाधान नही निकाला जा सका है। रिसर्च जारी है, लेकिन अभी भी वैज्ञानिक इसपर शोध कर रहे है। प्राकृतिक आपदा के समाधान के लिए एक साथ आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमसंवाद कार्यक्रम इन्ही सब समस्याओं और विचार विमर्श करने और हिमालय क्षेत्रों का विकास करने का जरिया है। जहां पर बाहरी देशों के लोग भी एक मंच पर आकर समस्याओं का उत्तर ढूंढने का प्रयास करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि युवा शक्ति आगे आकर हिमालय क्षेत्रों में आने वाली हर उस समस्या का समाधान कर सकते है। जिन सब समस्याओं से आज हिमालय क्षेत्र जूझ रहे है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार युवाओ को आगे बढ़ने के लिए और नए नए शोध करने के लिए प्रेरित करते रहते है। आने वाले समय मे भारत सोने की चिड़िया नहीं सोने का शेर बनकर उभरने वाला है।
