चिंतपूर्णी, विकास -:हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में आज आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। माता रानी की पावन जयंती के अवसर पर मंदिर परिसर में वर्षों पुरानी चंदन की टोकरी को एक नई और आकर्षक पालकी में विधिपूर्वक स्थापित किया गया। इस पहल को मंदिर की प्राचीन परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष चंदन की टोकरी का उपयोग माता रानी के शयन के समय किया जाता रहा है। यह टोकरी कुछ वर्ष पहले कर्नाटक के मैसूर से विशेष रूप से बनवाकर एक श्रद्धालु द्वारा मंदिर में अर्पित की गई थी। इससे पहले मंदिर में पारंपरिक रूप से बांस से बनी टोकरी का उपयोग होता था, जो स्थानीय परंपरा का हिस्सा रही है।हालांकि, समय के साथ चंदन की इस टोकरी में दरारें आने लगीं। मंदिर के पुजारियों ने इसे एक धार्मिक संकेत मानते हुए पुनः पारंपरिक बांस की टोकरी के उपयोग को शुरू कर दिया और चंदन की टोकरी को सुरक्षित रख लिया गया। इसके बावजूद, इस टोकरी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बना रहा।इसी परंपरा को सम्मान देते हुए, माता की जयंती के अवसर पर पंजाब के मुक्तसर से आए श्रद्धालु शमी बाबा ने मंदिर को सागवान की लकड़ी से बनी एक भव्य पालकी भेंट की। यह पालकी अपनी मजबूत बनावट और सुंदर नक्काशी के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के पुजारी साहिल कालिया द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात चंदन की ऐतिहासिक टोकरी को नई पालकी में सुरक्षित और सुसज्जित रूप से स्थापित किया गया। अब इसे मंदिर के मुख्य हॉल में रखा गया है, जहाँ श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकेंगे।मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस धरोहर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी देने के लिए जल्द ही एक सूचना पट्ट लगाया जाएगा, जिसमें टोकरी के इतिहास, उपयोग और परंपरा से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
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