कुल्लू, मनमिंदर अरोड़ा -:हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला मुख्यालय स्थित रघुनाथ मंदिर में वीरवार को नव संवत 2083 का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने भगवान रघुनाथ के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। नव संवत के शुभारंभ के साथ ही चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण भी मंदिरों में आस्था का माहौल देखने को मिला।
मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान राजपुरोहित द्वारा नव संवत 2083 को लेकर साल भर की भविष्यवाणी भी की गई। राजपुरोहित प्रवीण शर्मा ने बताया कि इस वर्ष का नाम “रौद्र” संवत है, जिसमें राजा के रूप में बृहस्पति और मंत्री के रूप में मंगल ग्रह का प्रभाव रहेगा। उन्होंने कहा कि बृहस्पति के राजा होने से कृषि कार्यों में वृद्धि होगी और धन-धान्य में बढ़ोतरी के संकेत हैं, जिससे किसानों और आम जनता को लाभ मिल सकता है।हालांकि, मंत्री के रूप में मंगल के प्रभाव को लेकर उन्होंने सतर्क रहने की भी सलाह दी। उनके अनुसार, मंगल के प्रभाव के चलते वर्ष के दौरान कुछ स्थानों पर प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ और आगजनी की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इस कारण यह वर्ष पूरी तरह शुभ नहीं बल्कि मिला-जुला प्रभाव देने वाला रहेगा। उन्होंने लोगों से धार्मिक गतिविधियों में अधिक भाग लेने और आस्था बनाए रखने की अपील की, ताकि नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
वहीं, भगवान रघुनाथ के छड़ी बरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि जहां लोग अंग्रेजी नववर्ष को बड़े उत्साह से मनाते हैं, वहीं सनातन धर्म के नव संवत को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी देखी जाती है। उन्होंने कहा कि कई लोगों को नव संवत का नाम तक याद नहीं रहता, जो चिंता का विषय है।उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी इस पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं और देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी से अपील की कि नव संवत के महत्व को समझें, इसका प्रचार-प्रसार करें और अपने परिवारों में इस दिन से जुड़े रीति-रिवाजों का पालन करें, ताकि सनातन संस्कृति को मजबूत किया जा सके।
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