ऊना: प्लास्टिक का इस्तेमाल सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी बहुत खतरनाक है। इससे ना ही पर्यावरण दूषित होता है बल्कि कई तरह की बीमारियां भी फैलती हैं। यही नहीं देश भर में बढ़ रहे कचरे का भी सबसे बड़ा कारण प्लास्टिक ही है, क्योंकि इसे नष्ट करना काफी मुश्किल होता है।

ऐसे में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर बैन लगने के बाद बांस का इस्तेमाल होगा। अब सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लग गया है। अब इन वस्तुओं के विकल्प तलाशें जा रहे हैं।

बंगाणा से बांस के कई उत्पाद बनने शुरू हुए हैं। बांस से स्ट्रा तैयार किए जा रहे हैं। इसकी मांग पंजाब से आ रही है। बांस के तिरंगे व कैंडी स्टिक भी बनाई गई है।

इसके अतिरिक्त प्लास्टिक के झंडे, प्लास्टिक स्टिक, ईयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक, कैंडी स्टिक व आइसक्रीम की डंडियों की जगह प्रयोग होने के लिए बांस के उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
एक स्ट्रा तैयार करने में करीब 20 मिनट लगते हैं और स्ट्रा की लागत 15 रुपए तक आती है। एक स्ट्रा 20 रुपए में बेचते हैं। इस स्ट्रा को एक से अधिक बार प्रयोग किया सकेगा क्योंकि स्ट्रा के साथ ब्रश भी होगा जिससे स्ट्रा की सफाई की जा सकेगी।
बैंबू विलेज में बांस आधारित फर्नीचर निर्माण इकाई, बांस का ट्रीटमेंट व सीजनिंग प्लांट, डिपो, बैंबू नेचर पार्क, कैफे, शापिंग कांप्लेक्स, बांस प्रशिक्षण केंद्र और बैंबू नर्सरी बनेगी।

