Dharamshala, Rahul-:जल शक्ति विभाग में कार्यरत पैरा कर्मियों ने सरकार से आठ वर्ष के बजाय पांच वर्ष की सेवा पॉलिसी लागू करने की मांग तेज कर दी है। पैरा कर्मियों का कहना है कि यदि पॉलिसी को शार्ट टर्म नहीं किया गया तो वे पेंशन जैसे महत्वपूर्ण लाभों से वंचित रह जाएंगे। मांगों पर सरकार द्वारा शीघ्र निर्णय न लिए जाने की स्थिति में पैरा कर्मियों ने फरवरी माह से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में कर्मचारी संघर्ष मोर्चा और पैरा कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमन शर्मा ने सरकार पर पैरा कर्मियों के भविष्य को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग में पैरा पंप ऑपरेटर और पैरा फीटर वर्ष 2017 से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2020 में विभाग में तीन श्रेणियों—पैरा पंप ऑपरेटर, पैरा फीटर और मल्टी पर्पज वर्कर—की भर्ती की गई थी।अमन शर्मा ने बताया कि भर्ती के समय मल्टी पर्पज वर्कर का मानदेय 3900 रुपये और पैरा पंप ऑपरेटर व फीटर का मानदेय 4600 रुपये निर्धारित किया गया था। वर्तमान में पैरा पंप ऑपरेटर और फीटर को 6600 रुपये मानदेय दिया जा रहा है, जबकि मल्टी पर्पज वर्कर को इससे भी कम राशि मिल रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में यह मानदेय बेहद अपर्याप्त है, बावजूद इसके पैरा कर्मी बिना किसी अतिरिक्त मांग के सेवाएं दे रहे हैं।
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सरकार की ओर से पैरा पंप ऑपरेटर और फीटर के लिए आठ वर्ष की पॉलिसी तय की गई है, जबकि मल्टी पर्पज वर्कर की पॉलिसी को अभी तक विचाराधीन बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि किसी भी श्रेणी के लिए अब तक पॉलिसी की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। वर्ष 2017 में नियुक्त पैरा कर्मियों का आठ वर्ष का कार्यकाल अक्टूबर माह में पूरा हो चुका है, लेकिन जनवरी माह आधा बीत जाने के बावजूद उनकी स्थिति को लेकर सरकार ने कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया है।अमन शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी कैबिनेट बैठक में पैरा कर्मियों के संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की जाती है, तो जल शक्ति विभाग के पैरा कर्मी अगले माह से हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।उन्होंने कहा कि सरकार से लगातार यह आग्रह किया जा रहा है कि पैरा कर्मियों के लिए आठ वर्ष के बजाय पांच वर्ष की पॉलिसी बनाई जाए। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि कई पैरा कर्मी 40 से 45 वर्ष की उम्र में नियुक्त हुए हैं। आठ वर्ष की लंबी पॉलिसी के चलते वे नियमित होने में देरी का शिकार हो जाएंगे और पेंशन लाभ से वंचित रह सकते हैं।
अमन शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जिस तरह से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की बात कर रही है, उसके लिए कम से कम दस वर्ष की नियमित सेवा आवश्यक है। आठ वर्ष की पॉलिसी के कारण पैरा कर्मी ओपीएस का लाभ लेने की स्थिति में ही नहीं आ पाएंगे। उन्होंने कहा कि शार्ट टर्म यानी पांच वर्ष की पॉलिसी ही पैरा कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है।उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्रों में विपक्ष लगातार पैरा कर्मियों के मुद्दे को उठाता रहा है। इस बार सत्तापक्ष से भी कैबिनेट रैंक के नेता आरएस बाली ने सदन में पैरा कर्मियों की आवाज बुलंद की है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
अमन शर्मा ने कहा कि पैरा कर्मी वर्तमान मानदेय पर ही काम करने को तैयार हैं। पैरा पंप ऑपरेटर और फीटर 6600 रुपये तथा मल्टी पर्पज वर्कर 5500 रुपये में भी सेवाएं देने को राजी हैं, बशर्ते सरकार पॉलिसी अवधि को आठ वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दे। उन्होंने कहा कि ग्राउंड जीरो पर काम करने वाले पैरा कर्मियों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।उन्होंने जानकारी दी कि 17 जनवरी के बाद पैरा कर्मी उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मिलकर अपनी मांगों को एक बार फिर रखेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो फरवरी माह से प्रदेशभर में पैरा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे।
