विकास शर्मा,चिंतपूर्णी: जसवां-परागपुर क्षेत्र में लोगों की समस्याओं को लेकर लबें समय से समाजसेवी संजय पराशर काम कर रहे है। पराशर का लक्ष्य है कि वह क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य,रोजगार के साथ नारी सशक्तीकरण, गरीबी उन्मूलन व पर्यावरण संरक्षण को लेकर जमीनी स्तर पर कार्य करेंगे। यह बात उन्होंने आज गंगोट व समनाेली पंचायतों में जनसंवाद कार्यक्रमों में स्थानीय वासियों से रूबरू होते हुए कही।
पराशर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जसवां-परागपुर के लिए मेडीकल कॉलेज व इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना उनकी प्राथमिकता में शामिल है तो हर वर्ष पांच हजार युवाओं को नौकरियां उपलब्ध करवाने के लिए पूरी ताकत से वह काम करेंगे। क्षेत्र में रोजगार के साधन बढ़ें, इसके लिए विभिन्न कंपनियों के क्षेत्रीय कार्यालय खुलवाना और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करने पर जोर दिया जाएगा। संजय ने कहा कि अगर उन्हें क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है तो जसवां-परागपुर में आंखों का अस्पताल ओर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोला जाएगा।
पराशर ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के तहत उनका संकल्प है कि हर वर्ष जसवां-परागपुर क्षेत्र में 500 गरीब परिवारों के मकानों के निर्माण में सहयोग दिया जाएगा। इसके अलावा आर्थिक रूप से अक्षम परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में भी मदद की जाएगी। पराशर ने कहा कि आम जनमानस को अपने घर-द्वार पर ही सरकारी योजनाओं की जानकारी व लाभ मिल सके, इसके लिए पंचायत मुख्यालयों में व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। संजय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप और महिला मंडल भवनों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि गांव की महिलाएं सीधे स्वरोजगार से जुड़ सकें।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी विशेष अभियान के तहत काम किया जाएगा। पेड़ों के अवैध कटान पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे तो हर वर्ष वन्य क्षेत्र में दो लाख पौधरोपण भी किया जाएगा, जबकि किसानों की बंजर पड़ी भूमि पर फलदार पौधे रोपित करने की मुहिम चलाई जाएगी। पराशर ने कहा कि अभी तक क्षेत्र के नीति निर्धारकों ने जसवां-परागपुर के हितों की अनदेखी ही की है। क्षेत्रवासी जिन सुविधाओं के हकदार थे और समय के साथ जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थे, उनके मिलने में हुई देरी के लिए उत्तरदायी लोगों को जबाव देना ही होगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई गांवों से पलायन इसलिए हुआ क्योंकि वहां वर्षों के इंतजार के बाद भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकीं। अब भी कई गांवों में हालात दशकों पुराने ही हैं। पराशर ने कहा कि वह गांवों से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए भी काम करेंगे और आसपास के क्षेत्रों में ही रोजगार के साधनों का सृजन हो, इसके लिए प्रयास करेंगे।
