संजु चौधरी, शिमला: शिमला के आईजीएमसी में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांस प्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश व आई बैंक आईजीएमसी ने गुरुवार को अंगदान व नेत्रदान के प्रति जागरूकता अभियान छेड़ा गया। इसमें सुपर स्पेशलिटी वर्ल्ड और कार्डियोलॉजी वार्ड के बाहर मरीजों के साथ आए तीमारदारों और स्टॉफ को अंगदान के बारे में जानकारी दी गई। अस्पताल की मेट्रन हरिप्रिया ने बताया कि नेत्रदान कोई भी व्यक्ति कर सकता हैं। चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या लिंग का हो।
नेत्रदान करने और उसके बाद प्रत्यारोपण करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाती। आईजीएमसी का नेत्र बैंक 25 किलोमीटर के दायरे में घर पर हुई मृत्यु के बाद 6 घंटे के भीतर नेत्र एकत्रित करता हैं। मरने के बाद नेत्रदान करना दूसरों की जिंदगी में उजाला लेकर आता हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सरकार की ओर से सोटो संस्था की स्थापना की गई हैं। यह संस्था प्रदेश में जगह-जगह जाकर लोगों में अंगदान के प्रति भ्रांतियों को दूर करने में जुटी हुई हैं। देश में प्रतिदिन प्रत्येक 17 मिनट में एक मरीज ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हुए जिंदगी से हाथ धो बैठता हैं।
एक व्यक्ति जिसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष को स्वैच्छिक रूप से अपने करीबी रिश्तेदारों को देश के कानून व नियमों के दायरे में रहकर अंगदान कर सकता हैं। अंगदान एक महान कार्य है जो हमें मृत्यु के बाद कई जिंदगियां बचाने का अवसर देता हैं।अंगदान के संबंधित सही जानकारी व भ्रम होने की वजह से अधिकतर लोग अंगदान करने से पीछे हट जाते हैं, इसीलिए अगर लोगों में पहले से अंगदान को लेकर पर्याप्त जानकारी होगी तभी ऐसे मौके जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। कार्यक्रम में सोटो की आईईसी मीडिया कंसलटेंट रामेश्वरी, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार और प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप सहित अन्य स्टाफ नर्सें मौजूद रही।
