राहुल चावला, धर्मशाला: लंबे अरसे के बाद आखिरकार धर्मशाला के जदरांगल में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्थायी कैंपस निर्माण का साफ़ हो गया हैं। यह कैंपस अब जदरांगल में ही बनेगा। सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने करीब 57.10 हैक्टेयर वन भूमि में भवन निर्माण को मंजूरी प्रदान कर दी हैं, जिसके चलते 13 सालों से केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्थायी कैंपस निर्माण का जो कार्य देहरा और धर्मशाला के बीच झूल रहा था अब वो पूरा होगा।
भारत सरकार की ओर से दी गई इस मंजूरी का क्रेडिट धर्मशाला का गैर सरकारी संगठन जन चेतना मंच ले रहा हैं। इसके लिए बाकायदा जन चेतना मंच धर्मशाला के पदाधिकारी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी कैप्टन जेएम पठानिया ने प्रेस वार्ता कर इस बाबत जानकारी सांझा की हैं। जेएम पठानिया ने कहा कि उनका संघर्ष रंग लाया है, दरअसल उन्होंने जदरांगल में चिन्हित वन भूमि पर पेंच फंसने से धर्मशाला से देहरा शिफ्ट होते केंद्रीय विश्वविद्यायल के स्थायी कैंपस निर्माण का कार्य इसी भूमि पर करवाने के लए भारत की केंद्र सरकार को वन भूमि क्लियरेंस के लिए प्रस्ताव भेजा था जिसे विधिवत मंजूरी मिल गई हैं।
उन्होंने कहा कि अब इसके बाद एक और बड़ी चुनौती उनके सामने है और वो ये है कि यहां न केवल स्थायी कैंपस का निर्माण हो बल्कि जो धर्मशाला की लिहाज़ से केंद्रीय विश्वविद्धालय के जो प्रासांगिक (relevant) विभाग हैं वो यहीं से चलें और जिनकी प्रासांगिकता देहरा में है वो वहां से चलाएं जाएं, ताकि इसका विश्वविद्यालय फैकल्टी और छात्रों को लाभ मिल सके। ख़ास तौर पर वो विभाग जो पहले से ही यहां चल रहे हैं उन्हें तो बिल्कुल भी शिफ्ट न किया जाए, जिससे कि छात्र और फैकल्टी प्रभावित हो सकती हैं।
वहीं उन्होंन कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की मेडिकल सांइस विभाग को तो धर्मशाला से ही चलाया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इसका विश्वविद्यालय दोहरा लाभ भी उठा सकता हैं क्योंकि जहां एक ओर धर्मशाला के नजदीक मेडिकल कॉलेज टांडा है तो वहीं दूसरी ओर जोनल अस्पताल धर्मशाला भी हैं जिसका लाभ छात्र और फैकल्टी दोनों ही उठा सकते हैं। जेएम पठानिया ने कहा कि जन चेतना मंच अपने संघर्षशील कार्यों से अपना स्तर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना चाहते हैं इसके लिए उन्हें जो करना पड़ा वो निश्चित तौर पर करेंगे।
