सिरमौर, 11 फरवरी -:सिरमौर जिले में आरडीजी (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। जिला भाजपा प्रवक्ता मेलाराम शर्मा ने प्रदेश सरकार पर इस विषय को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आरडीजी का 31 मार्च 2026 के बाद बंद होना कोई अप्रत्याशित निर्णय नहीं है, बल्कि यह पहले से तय व्यवस्था का हिस्सा था। वित्त आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख था कि निर्धारित अवधि के बाद यह अनुदान समाप्त हो जाएगा।
शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार को सत्ता संभालते समय ही इस स्थिति का आकलन कर लेना चाहिए था और भविष्य की आर्थिक रणनीति तैयार करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन अपनाने के बजाय अनावश्यक खर्चों पर अधिक ध्यान दिया, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शुरुआत से ही संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया होता, तो आज हालात अलग हो सकते थे।भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने विभिन्न सलाहकारों, बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों के माध्यम से प्रशासनिक ढांचा बड़ा किया, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। उनका कहना है कि प्रदेश पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था, ऐसे में खर्चों को नियंत्रित करना प्राथमिकता होनी चाहिए थी।
शर्मा ने प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने तीन वर्षों में अपेक्षाकृत अधिक ऋण लिया है। उनके अनुसार, जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि लिए गए ऋण का उपयोग किन विकास कार्यों में किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की आवश्यकता है।
हालांकि, सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं और कई योजनाएं दीर्घकालिक लाभ के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं। आरडीजी के मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर विपक्ष वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार अपने निर्णयों को परिस्थितिजन्य आवश्यकता बता रही है।
