राहुल चावला,धर्मशाला: धर्मशाला में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए वर्तमान सुक्खू सरकार और पूर्व की जयराम की सरकार दोषी हैं। अधिकारियों ने भी इस मामले में लापरवाही बरती है और संवेदनशीलता नहीं दिखाई, ऐसे अधिकारियों पर भी एक्शन होना चाहिए। धर्मशाला में सीयू के लिए अभी तक 24 हेक्टेयर गैर वन भूमि ही हस्तांतरित हो पाई है, जबकि भवन निर्माण के लिए 65 हेक्टेयर और भूमि की जरूरत है, जिसे अभी तक दोनों सरकारें हस्तांतरित नहीं कर पाई हैं। यह आरोप कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद किशन कपूर ने सोमवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता में लगाए।
सीयू पर होती रही राजनीति और दुष्प्रचार
कपूर ने कहा कि सीयू पर लंबे समय से राजनीति होती आई है, कई लोगों ने दुष्प्रचार भी किया। कुछ सामाजिक संस्थाएं भी यह भ्रम फैलाती रही कि अब धर्मशाला में सीयू नहीं बन पाएगी। कपूर ने कहा कि जब उन्होंने इस बारे में संसद में सवाल पूछा तो जवाब दिया गया कि 24 हेक्टेयर गैर वन भूमि तो हस्तांतरित हुई है, लेकिन 65 हेक्टेयर भूमि नहीं दी गई है और न ही 65 हेक्टेयर भूमि बारे प्रदेश सरकार कोई दस्तावेज केंद्र के समक्ष प्रस्तुत कर पाई है। 3 से 4 साल तक केंद्र सरकार को किसी प्रोजेक्ट की भूमि हेतू जवाब न देना दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मशाला में सेंट्रल यूनिवर्सिटी जल्द बननी चाहिए। कपूर ने बताया कि अब प्रदेश सरकार ने 20 मार्च को केंद्र सरकार को जवाब फाइल किया हैं।
टूरिज्म हब का मास्टर प्लान बताए सरकार
कपूर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सुक्खू सरकार ने जिला कांगड़ा को टूरिज्म हब बनाने की घोषणा तो की है, लेकिन इसके लिए बजट में कितना प्रावधान किया हैं। इसके लिए सरकार का मास्टर प्लान क्या हैं, इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया हैं। किशन कपूर ने कहा कि जिला कांगड़ा सरकार बनाता है और इसी जिला के प्रति सरकारों का उदासीन रवैया रहा हैं। दलों को सत्ता से बाहर होने पर ही जिला कांगड़ा की याद आती हैं
