शिमला, संजू-:विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 के विरोध में गुरुवार को प्रदेशभर में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय विद्युत कर्मचारी एवं इंजीनियर समन्वय समिति (NCCOEEE) के आह्वान पर कर्मचारियों ने टूल डाउन और पेन डाउन स्ट्राइक करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध जताया।
शिमला के कुमार हाउस में भी भोजनावकाश के दौरान बड़ी संख्या में विद्युत कर्मियों ने एकत्र होकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही नियमित कार्यों में बढ़ती आउटसोर्सिंग और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।HPSEBL संयुक्त समन्वय समिति के संयोजक हीरालाल वर्मा ने बताया कि प्रदेश की लगभग 65 तहसीलों में बिजली कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर इस विधेयक का विरोध किया। उनका कहना है कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक में मल्टी लाइसेंस व्यवस्था के जरिए निजी कंपनियों को बढ़ावा देने का प्रावधान है, जिससे सरकारी विद्युत तंत्र कमजोर होगा।उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरिंग योजना भी निजीकरण की दिशा में एक कदम है। कर्मचारियों के अनुसार केंद्र सरकार की नीतियों का सीधा असर प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आरडीजी (RDG) जैसी योजनाओं को बंद करने और अन्य वित्तीय प्रावधानों के जरिए राज्यों पर दबाव बनाया जा सकता है।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
