जगत सिंह बैंस, नालागढ़: प्रदेश में बीते कुछ दिनों से मौसम खराब चल रहा हैं। मौसम खराब होने की वजह से प्रदेश में ऊंचाई वाले क्षेत्र में जहां बर्फबारी हो रही है तो वहीं मैदानी इलाकों में जमकर बारिश हो रही हैं। बे मौसमी हो रही इस बारिश की वजह से किसानों को भारी नुकसान हो रहा हैं। नालागढ़ में बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश किसानों पर कहर बनकर बरसी हैं। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के तहत पड़ने वाले चंगर, बद्दी बरोटीवाला में किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल तेज बारिश, तूफान व ओलावृष्टि के कारण तबाह हो चुकी हैं ।
बता दें कि दो दिनों से ही लगातार तेज बारिश शुरू हो गई थी और इस तेज बारिश के कारण गेहूं की फसलों को भारी नुकसान हुआ हैं। तेज तूफान के कारण फसलें जमीन पर बिछ चुकी है और किसानों की करीबन 60 से 70 फ़ीसदी फसल तबाह हो चुकी हैं। अब किसानों को आर्थिक संकट का खतरा मंडराने लगा है और अपने परिवार के पालन पोषण की भी चिंता होने लगी हैं क्योंकि बच्चों की तरह पाली हुई फसल अब खत्म होने की कगार पर आ चुकी हैं। किसान खासे परेशान है और पीड़ित किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार से पहाड़ी हल्के की तर्ज पर जैसे सेबों के नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है उसी तरह गेहूं की फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई हैं।
इससे फसलों के नुकसान की तो भरपाई नहीं हो पाएगी लेकिन पीड़ित किसान अपने परिवार का इस महंगाई के दौर में पालन पोषण कर सके यह काफी होगा। अब देखना यह होगा कि कब सरकार और प्रशासन व संबंधित एग्रीकल्चर विभाग किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई करता है और कब किसानों को आ रही परेशानियों से निजात मिलतीहैं।
वहीं स्थानीय किसानों का कहना है कि काफी लंबे समय से किसान बारिश की उम्मीद कर रहे थे लेकिन जब बारिश की जरूरत थी तब बारिश नहीं पड़ी लेकिन अब बे मौसमी बारिश और तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण 60 से 70 फीसदी गेहूं की फसलों को नुकसान हुआ हैं। तेज हवाओं के कारण किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ चुकी है जिससे किसानों को बहुत नुकसान हुआ हैं। पीड़ित किसानों का कहना है कि इस महंगाई के दौर में अब उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण की चिंता सताने लगीहैं और उन्होंने प्रदेश सरकार से उचित मुआवजे की मांग उठाई हैं।
