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ऊना के रोबिन सैणी ने अपनाई स्वरोजगार की राह,नौकरी छोड़ मशरूम की खेती से की लाखों की कमाई

admin
admin 5 Min Read
Updated 2023/02/25 at 3:22 PM
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राकेश, ऊना: आज के दौर में जहां युवा वर्ग नौकरियों के पीछे भाग रहा है और उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं तो वहीं ऊना का एक युवा ऐसा हैं जिसने अपनी इंजीनियर की नौकरी छोड़ स्वरोजगार की राह अपनाई हैं। जिला ऊना के लोअर अरनियाला के युवा रॉबिन सैणी उन युवाओं में से है जिन्होंने नौकरी छोड़ खेती को अपनाया हैं ओर अब वे खेती से ही लाखों की कमाई कर रहे हैं।
 रोबिन जिन्हें घर की विपरीत परिस्थितियों के चलते इंजीनियर की नौकरी छोड़नी पड़ी। नौकरी छोड़ने के बाद आय के सभी साधन बंद हो गए, तो उन्होंने खुद का व्यवसाय आरंभ करने के बारे में सोचा और घर बैठे ही मशरूम की खेती करने का मन बनाया। वर्तमान में रोबिन सैणी सफलतापूर्वक मशरूम की खेती कर रहे हैं और अन्यों को भी इस व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। रोबिन सैणी का कहना है कि जैसी ही उन्होंने मशरूम की खेती करने का मन बनाया, तो सबसे पहले वह बागवानी विभाग के अधिकारियों से मिले और मशरूम उत्पाद के विषय से संबंधित पूर्ण जानकारी हासिल की।  मशरूम की खेती करने के लिए पालमपुर में पांच दिन का प्रशिक्षण लिया। खुम्ब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) सोलन से भी मशरूम की खेती करने में भी काफी सहयोग मिला।
मशरूम की खेती शुरू करने के लिए रोबिन सैणी ने बैंक से 16 लाख रूपए का ऋण लिया जिसमें विभाग के ओर 8 लाख रूपए की सबसिडी मिली। उन्होंने घर के एक कमरे से मशरूम की खेती 700 बैग लगाकर शुरू की, उसके उपरांत 15-20 दिन के अंतराल में उन्होंने तीन कमरों में मशरूम के 800-800 बैग में खेती करनी आरंभ की।  समय पर सीरीज़ में फसल तैयार होने से उन्हें बैंक की किस्त देने में किसी तरह की आर्थिक दिक्कत नहीं हुई और विभाग की ओर से भी उन्हें समय पर उपदान की राशि प्रदान की गई जिससे उन्होंने सीरीज़ में मशरूम की खेती की।
अबतक रोबिन सैणी मशरूम की पांच फसलें ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि उत्पादित मशरूम को स्थानीय बाजार के अतिरिक्त जिला के साथ लगते पड़ोसी जिला होशियारपुर और नंगल में भी इसकी बिक्री करते हैं। रोबिन सैणी ने बताया कि मशरूम उत्पादन पर आई कुल लागत का 50 प्रतिशत मुनाफा कमा लेते हैं। उन्होंने  मशरूम उत्पादन से 6 माह में करीब 2.5 लाख रूपए की आय अर्जित की हैं। रोबिन ने बताया कि विभागीय अधिकारी समय-समय पर मशरूम खेती का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं कि किस समय पर कौन सी ऐहतियात बरतनी है।
रोबिन सैणी का कहना है कि बेरोजगार युवा इस फार्मिंग को अपनाएं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के लिए मशरूम की खेती करना एक अच्छा विकल्प हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती एक फैमिली फार्मिंग है जिसे परिवार के सदस्यों के साथ घर बैठकर आसानी से किया जा सकता हैं। उन्होंने बेरोजगार युवाओं से आग्रह किया कि वे रोजगार के लिए बाहरी राज्यों का रूख न करें, अपितु सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर घर बैठे ही स्वरोजगार को अपनाकर अपने घर की आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
विषय विशेषज्ञ बागवानी विभाग ऊना डाॅ. के.के भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के किसानों/बागवानों के उत्थान के लिए बागवानी के क्षेत्र में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं के तहत हिमाचल खुम्ब विकास एक प्रमुख योजना हैं। इस योजना के तहत प्रदेश के किसानों व बागवानों को 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान हैं। के.के भारद्वाज ने बताया कि खुम्ब उत्पादन का कार्य करने के लिए किसानों व बागवानों को पहले छोटे स्तर पर खुम्ब उत्पादन का कार्य करना चाहिए।
उन्होंने किसानों/बागवानों से आवाह्न किया कि वे पहले छोटे स्तर की खुम्ब उत्पादन ईकाई से अपना कार्य आरंभ करें जैसे ही मशरूम के कार्य में अनुभव हो जाता है तो किसान व बागवान मशरूम की खेती करने के लिए बडे़ स्तर की ईकाई पर कार्य कर सकते हैं। उन्होंने जिला के नौजवानों से मशरूम उत्पादन की खेती का स्वरोजगार अपनाने की अपील की ओर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
TAGGED: adopted, farming, mushroom, Robin Saini, self-employment, una
admin February 25, 2023
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