मनमिन्दर अरोड़ा/कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में कई ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिन्होंने प्रदेश का नाम सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा किया है। इन्हीं प्रतिभाओं की वजह से प्रदेश की आन और शान बनी हुई है। इस तरह की प्रतिभाओं की खोज शुरू कर दी है और हिमाचली शान में इस तरह के व्यक्तित्व को पूरा स्थान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला कुल्लू के एक ऐसे व्यक्तित्व को खोजा है जो शॉल.टोपी के अलावा राजनीति तक के ताना बाना बुनने में माहिर है। यह व्यक्तित्व हैं सहकारी आंदोलन के मसीहा एवं पूर्व मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर। सत्य प्रकाश ठाकुर ने बुनकर तक से लेकर राजनीति का जो सफर तय किया है उसमें वे प्रेरणास्त्रोत अपने स्वर्गीय पिता ठाकुर वेद राम को मानते हैं। गौर रहे कि ठाकुर वेद राम जहां सहकारी आंदोलन के दूत माने जाते हैं, वहीं भुट्टिको शॉल की आत्मा से पहचाने जाते हैं। उन्हीं के घर जन्में सबसे बड़े पुत्र सत्य प्रकाश ठाकुर ने आज कुल्लू शॉल.टोपी व यहां के अन्य हथकरघा उत्पादों को विश्व पहचान दिलाई है।

कुल्लू शॉल-टोपी को विश्व भर में दिलाई अलग पहचान
आज कुल्लू शॉल का जो पूरे विश्व में नाम है उसका श्रेय सत्य प्रकाश ठाकुर को जाता है। हालांकि उनके पिता स्वर्गीय वेद राम ठाकुर ने कुल्लू शॉल की नींव रखकर उसी दौरान पूरे विश्व में विख्यात किया था ,लेकिन उनके मरणोपरांत सत्य प्रकाश ठाकुर ने जहां शॉल उद्योग को आसमान की ऊंचाईयों पर पहुंचाया। वही अपने पिता के सपने को साकार करके उनका नाम रोशन किया है।1971 में वेद राम ठाकुर के निधन के बाद समिति के सदस्यों ने सत्य प्रकाश ठाकुर को संस्था का नया अध्यक्ष चुना। सत्य प्रकाश ठाकुर ने अपने कुशल नेतृत्व में कुल्लू शॉल उद्योग को न केवल उत्कृष्ट उत्पाद के रूप में स्थापित किया बल्कि अपने पिता के सपनों को भी चार चांद लगाए। जो शॉल उत्पादों को देश व विदेश में अव्वल दर्जे की पहचान देना चाहते थे। आज कुल्लू शॉल सिर्फ अपने ही देश में नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। सत्य प्रकाश ठाकुर ने कुल्लू शॉल के लिए नए.नए डिजाइन दिए जो आज के फैशन के दौर में ग्राहकों की मन पसंद मांग है।वर्ष 1979 से शॉलों का निर्यात जब विदेशों के लिए किया गया उसके बाद कुल्लू शॉल का कारोबार हर वर्ष करोड़ों में हो रहा है। आज कुल्लू शॉल उद्योग के माध्यम से सैंकड़ों लोगों को जहां परोक्ष रूप से रोजगार दिया जा रहा है। वहीं हजारों लोगों को अपरोक्ष रूप से रोजगार मुहैया हो रहा है।

राजनीति भी अपने पिता से ही सीखी
अब यदि सत्य प्रकाश ठाकुर के कुशल बुनकर व राजनीतिज्ञ के इतिहास को खंगाला जाए तो चौथी कक्षा में ही उन्होंने बार्डर बुनना सिखा था पांचवी कक्षा में मफलर तथा छठी कक्षा तक शॉल निर्माण में वे माहिर हो चुके थे। आठवीं कक्षा तक वे सफल बुनकर बन चुके थे। यही नहीं छुट्टियों में वे शॉल के शोरूम में कार्य किया करते थे। इस तरह सत्य प्रकाश ने अपने पिता से हमेशा मेहनत की शिक्षा ग्रहण की। सत्य प्रकाश ठाकुर के पिता को राजनीति में भी शौक था और वे पीज पंचायत के प्रधान के अलावा पंचायत समिति तथा जिला परिषद कुल्लू के सदस्य भी रहे। इसी तरह सत्य प्रकाश ने राजनीति भी अपने पिता से ही सीखी। छात्र राजनीति से सत्य प्रकाश ठाकुर सक्रिय रहे और बंजार के दो बार विधायक बनने के अलावा एक बार हिमाचल सरकार में बागवानी मंत्री के पद पर भी आसीन रहे। यही नहीं राजनीति में वे कई अहम पदों पर रहे। यहां खास बात यह रही कि राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने अपने पुस्तैनी कारोबार को दरकिनार नहीं किया। आज भी वे जहां राजनीति का पूरी तरह से शौक रखते हैं। वहीं सफल बुनकर के अलावा हजारों लोगों को भी बुनकर की शिक्षा दी तथा कुल्लू हथकरघा उद्योग को बुलंदियों पर पहुंचाने में कार्य कर रहे हैं। हथकरघा व बुनकर उद्योग में उन्हें कई बार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अवार्ड देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।

शॉल उद्योग में क्या रही उपलब्धियां
*वर्ष 2005 में नेशनल अवार्ड से सम्मानित
*वर्ष 2006 में उद्योग रत्न अवार्ड से सम्मानित
*वर्ष 2008 को.ऑपरेटिव ऐक्सिलेंस अवार्ड से सम्मानित
*इसके अलावा राज्य व नेशनल स्तर के कई अवार्डों से सम्मानित
*कुल्लू शॉल को दिए कई नए डिजाईन
*कुल्लू के हथकरघा उत्पादों को विदेशों में दिलाई अलग पहचान
प्रदेश में राजनीतिक सफर
* 1972 में प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव
*1973 में ब्लॉक समिति कुल्लू के चेयरमैन
*1984 में बंजार विधानसभा क्षेत्र के विधायक
*1993 में बंजार विधानसभा क्षेत्र के फिर से विधायक और प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव
*1994 में प्रदेश सरकार में बागवानी मंत्री
*2003 में प्रदेश विपणन बोर्ड के अध्यक्ष
*इसके अलावा जिला सहकारी संघ के कई बार अध्यक्ष चुने गए।
