6राहुल चावला , धर्मशाला: भारत तिब्बत सहयोग मंच अपने गठन के 25 साल सफलतापूर्वक मुकम्मल होने पर रजत जयंति मनाने जा रहा हैं। यह रजत जयंती कहीं और नहीं बल्कि धर्मशाला में ही मनाई जाएगी। इसके लिए बाकायदा राष्ट्रीय स्तर पर भी एक रणनीति तैयार की जएगी। सहयोग मंच के राष्ट्रीय महामंत्री पंकज गोयल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मंच की स्थापना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चौथे सरसंघचालक प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया समेत पांचवे सरसंघचालक केसी सुदर्शन, बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा और इंद्रेश कुमार जैसी बड़ी शख्सियतों ने 5 मई 1999 को की थी।
इस मंच के गठन का मुख्य मकसद तिब्बत की आजादी समेत कैलाश मानसरोवर की मुक्ति, भारत की सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा शामिल था। पंकज गोयल ने कहा कि इस मंच का जो बीजारोपण आज से 24 साल पहले हुआ था आज वह फलफूल कर इतना बड़ा बटवृक्ष बन चुका है कि देश के 47 प्रांतों और 3 सौ से अधिक जिलों में सक्रिय इकाइयों का गठन करके तिब्बत की आजादी के इस विषय को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहा हैं। साथ ही इसमें युवा और महिला शक्ति को भी जोड़ा गया हैं जिनके सहयोग से आज ये मंच अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा हैं।
गोयल ने कहा कि 5 मई को इस मंच के 24 साल मुक्ममल होंगे और ये जैसे ही 25वें साल में प्रवेश करेगा इसके उपलक्ष्य में देशभर में व्याप्क स्तर पर जन-जन तक पहुंचने के लिए उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन धर्मशाला में किया जाएगा,जहां देशभर की बड़ी शख्सियतें भी इसमें शरीक होंगी। इसके अलावा देशभर के 11 स्थानों पर हजारों की संख्या में जनसम्मेलनों का भी आयोजन होगा।
इसके साथ ही 3 सौ से अधिक जिलों में जन-जन तक छोटे-छोटे कार्यक्रमों के तहत अपने मकसद को पहुंचाने का प्रयास किया हैं। इतना ही नहीं देशभर के सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में विचार गोष्ठियों, सम्मेलनों के जरिये भी युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों तक अपने विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इन सबके अलावा अन्य अभियानों के तहत भी अपनी बात को देश में उठाया जाएगा जिसमें संत समाज सेमिनार प्रमुख रहेगा। संत समाज में सनातनी संत, बौद्ध लामा पंथी, गुरुद्वारों के ग्रंथी, जैन मत को मानने वाले जैन मुनियों समेत तमाम संतों के बीच में हमारी टोलियां जाकर संपर्क के माध्यम से अपना संदेश प्रचारित करेंगी।
गोयल ने कहा कि देश के व्यापारियों के बीच हमारे मत को मानने वाले व्यापारी कार्यकर्ता जाकर संपर्क साधेंगे। वहीं देश के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संपर्क साधा जायेगा ताकि वो भी तिब्बत की आजादी की बात संसद में उठा सकें.।
