विकास शर्मा, चिंतपूर्णी: हिमाचल के प्रसिद्ध चिंतपूर्णी मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा हैं। इस मंदिर में जो भी मनोकामना भक्तों की ओर से मां चिंतपूर्णी से की जाती हैं माता रानी उन्हें पूरा करती हैं और मनोकामना पूरी होने पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दंडवत, नंगे पांव, पैदल चलकर या जैसे मनोकामना करते हैं वैसे माता रानी के दरबार पहुंचते हैं।
शनिवार को भी एक ऐसा ही नज़ारा यहां देखने को मिला जब ऊना जिला के रक्कड़ कलोनी निवासी चिरंजीलाल और उनकी पत्नी पुष्पा रानी ने मां भरवाईं से 3 किलोमीटर दंडवत यात्रा कर मां चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचे और माता रानी का शुकराना अदा किया। बता दें कि चिरंजीलाल ऊना जिला के रक्कड़ कलोनी के रहने वाले हैं। उन्होंने मां चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेक कर प्रार्थना की थी उनका बेटा राजकुमार जब एचआरटीसी में पक्का हो जाएगा तो वह चिंतपूर्णी में 3 किलोमीटर की दंडवत यात्रा करेंगे।
बेटा 2016 में एचआरटीसी में भर्ती हो गया और अब जाकर एचआरटीसी में रेगुलर हो गया,जबकि पिता भी एचआरटीसी में ही कार्यरत थे और वह रिटायर हो गए हैं। अब जब उनका बेटा भी एचआरटीसी में रेगुलर हो गया हैं तो चिरंजीलाल को माता रानी के दरबार में की हुई प्रतिज्ञा को पूरी करने की याद आई हैं। इसके बाद चिरंजीलाल ने शनिवार को भंरवाई से पैदल 3 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी की ओर मां चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचे।
इस दौरान उनकी पत्नी पुष्पा रानी ने उनका सहयोग किया। इसके अलावा बेटा राजकुमार भी उनके साथ उपस्थित रहे। चिरंजी लाल ने बताया कि माता के दरबार में मनोकामना मांगी थी कि बेटे को सरकारी नौकरी लग जाए तो वह दंडवत यात्रा करेंगे आज मां के दरबार में उस प्रतिज्ञा को पूरा किया और माता रानी का शुकराना अदा किया हैं।
