Shimla, 15 May-आज अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस है — एक ऐसा दिन जब हम सिर्फ अपने घर के परिवार को नहीं, बल्कि अपने देश और समूची मानवता को एक बड़े परिवार के रूप में देखने का संकल्प लेते हैं। यदि हम कल्पना करें कि यह पूरी दुनिया एक गाँव है, तो भारत उस गाँव का वह परिश्रमी, उम्मीदों से भरा और संस्कारों से मजबूत परिवार है, जो निरंतर अपनी मेहनत और आत्मबल से प्रगति की ओर बढ़ रहा है।
वर्षों पूर्व जो भारत अभावों से जूझ रहा था, आज वही भारत विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, चिकित्सा और डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में नए आयाम छू रहा है।आज विश्व के विकसित देश — अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी जैसे राष्ट्र — भारत की प्रगति को आश्चर्य और सराहना से देख रहे हैं।हमारे पड़ोसी देशों में कुछ को यह परिवर्तन स्वीकारना कठिन लगता है।प्रतिस्पर्धा और संदेह के वातावरण में कई बार सहयोग की भावना भी प्रभावित होती है।लेकिन यही तो समय है जब भारत को और अधिक संगठित होकर, अपने आंतरिक मतभेद भुलाकर, समावेशी विकास औरआत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने चाहिए।क्योंकि परिवार वही होता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी एकजुट रहता है। और भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों का साझा सपना है — एक ऐसा सपना जिसे केवल मिलकर ही साकार किया जा सकता है।
