कुल्लू (मनमिन्द्र अरोड़ा): हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों से राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण द्वारा विभिन्न अंतराल से अनेक फोरलेन सड़कें बनाई जा रही हैं। जिसमें परवाणू-शिमला, किरतपुर- मनाली, मटोर-शिमला, पठानकोट-मंडी , पिंजौर-नालागढ़ , हमीरपुर–कोटली-मंडी आदि मार्ग शामिल हैं। इन फोरलेन के अतिरिक्त लगभग 63 नए राष्ट्रीय उच्च मार्ग बनाने के लिए परियोजनाओं के प्रारूप तैयार किये जा रहे है और रेलवे लाइन बिछाने के लिए भानुपल्ली से बिलासपुर-लेह एवं चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन के लिए भी भूमि अधिग्रहण की जा रही है। लेकिन प्रदेश की बीजेपी सरकार इन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों व दुकानदारों को बात आश्वासनों का झुनझुना थमा रही है।
कुल्लू में इन्हीं मुद्दों को लेकर फोरलेन प्रभावितों की संयुक्त संघर्ष समिति ने डीसी कुल्लू आशुतोष गर्ग से मुलाकात की और राष्ट्रपति को भी एक ज्ञापन भेजा गया। इस दौरान भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच के संयोजक जोगिंंद्र वालिया ने कहा की अब एयरपोर्ट निर्माण एवं विस्तार हेतु भी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है। इससे पूर्व पिछली सरकारों द्वारा बिजली निर्माण हेतु बांध/टावर लाइन बिछाने के लिए भी जमीन का अधिग्रहण किया गया है और आज भी किया जा रहा है। सभी प्रभावित मानते हैं कि यह सभी परियोजनाएं देश व प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक हैं। परंतु इसके साथ ही जुड़ा हुआ एक दूसरा पहलू भूमि अधिग्रहण से प्रभावित उन किसानों, दुकानदारों व अन्य नागरिकों का है जिनकी कृषि भूमि अथवा आजीविका, इस भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होती है।
जोगिंदर वालिया का कहना है कि अभी तक जहां भी विभिन्न परियोजनाओं के लिए सरकार द्वारा भूमि अर्जित की गई है। उनमें भूमि अधिग्रहण, 2013 कानून (पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुना मुआवजा) को हिमाचल सरकार पूर्णतः लागू नहीं कर रही है। हालांकि 2018 में मंत्री स्तर पर एक सब- कमेटी गठित कि गई थी जिसमें पुनर्स्थापना, पुनर्वास तथा भूमि अधिग्रहण, 2013 के अनुसार फैक्टर-2 (चार गुना मुआवजा) को लागू करने की बात तय हुई थी लेकिन 4.5 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी हिमाचल सरकार अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं ले पाई है।
भूमि अधिग्रहण, 2013 कानून के सभी प्रावधानों को हिमाचल सरकार लागू करे
संयोजक जोगिंद्र वालिया का कहना है कि ऐसे में भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच सरकार से मांग करता है कि भूमि अधिग्रहण, 2013 कानून (पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुना मुआवजा) के सभी प्रावधानों को हिमाचल सरकार लागू करे और 1 अप्रैल, 2015 कि अधिसूचना को रद्द किया जाये। वही, जिला स्तर पर सरकार, प्रशासन, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी व भूमि अधिग्रहण प्रभावितों की एक समिति गठित की जाए जो सभी हितधारकों के बीच समन्वय, समस्याओं के निवारण व परियोजना कार्यान्वयन में उचित निर्णय ले सके। इसके अलावा नए मेगा प्रोजेक्ट्स (एअरपोर्ट/रेलवे/सड़क) के लिए स्थान का चयन तकनीकी आधार पर सोशल इम्पैक्ट सर्वे के पश्चात ही किया जाए। गैर कृषि भूमि व जहां पर न्यूनतम विस्थापन हो ऐसी साइट को वरीयता दी जाए।
