कुल्लू /मनमिन्दर अरोड़ा- हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में महादेव को समर्पित एक एसा अद्भुत मन्दिर है जिसका नाम बिजली महादेव है | बिजली महादेव का मन्दिर रहस्यमय है, जंहा शिवलिंग पर पड़ने वाली आसमानी बिजली का अनोखा नजारा देखने को मिलता है|
शिवलिंग के टुकड़े होने पर जोड़ा जाता है मक्खन से
जिला कुल्लू में राजा खराहल पाल के नाम पर बसी खराहल घाटी के शिखर के अंतिम छोर पर समुद्र तल से 1924 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुलांत पीठ बिजली महादेव श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है|मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव युगों-युगों से तप योग समाधि द्वारा विराजमान हैं। बिजली महादेव मंदिर को जालंधर असुर के वध से जोड़ा गया है व दूसरे नाम से इसे कुलांत पीठ भी कहा जाता है। जब भी पृथ्वी पर भारी संकट आन पड़ता है तो भगवान शिव जीवों के उद्धार के लिए संकट को बिजली के प्रारूप में पिंडी रूप में अपने ऊपर धारण करते हैं।बिजली महादेव में आसमानी बिजली शिवलिंग पर गिरती है और यह शिवलिंग टुकड़े-टुकड़े होने पर चारों दिशाओं में बिखर जाता है | जिसके बाद पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को इकट्ठा करता है और मक्खन से जोड़ता है|हालांकि यहाँ गिरने वाली बिजली का समय निर्धारित नहीं होता है यह कभी भी किसी भी समय पिंडी पर गिरती है | एक यह चमत्कार भी देखने को मिलता है कि शिवलिंग में लगाया गया मक्खन कभी पिघलता नहीं चाहे जितनी भी गर्मी क्यों ना हो|आसमानी बिजली कई बार 60 फुट लंबी ध्वजा पर गिरती है ज्यादातर आसमानी बिजली के अंदर स्थापित शिवलिंग पर ही गिरती है | परंतु मंदिर को कुछ भी क्षति नहीं पहुंची है | बार-बार आसमानी बिजली गिरने के कारण मत्थान महादेव का नाम बिजली महादेव पड़ा |
बिजली महादेव को लेकर ये मान्यता प्रचलित
देव संस्कृति के जानकार डॉ सूरत ठाकुर के अनुसार यहा बिजली गिरने के कारण इसका नाम बिजली महादेव पडा | इसके पीछे कहा है कि यहाँ पुराने समय में कौलांत नाम का राक्षस रहता था | वह कभी नाग के रूप या अन्य विशालकाय रूप धारण कर लोगों व् देव देवताओं और उनकी तपस्या को भंग करता था | उससे तंग होकर सभी देवी देवता भगवान् शिव के पास पहुंचे |भागवान शिव ने उन्हें व वचन देते हुए कहा कि वे स्वयं यहाँ पहुंचेगे और इससे लोगों को मुक्ति देंगे | दिए गए वचन के मुताबिक़ जब भगवान् शिव यहाँ पहुंचे, तब उस समय यह राक्षस विशालकाय नाग का रूप धारण करके बैठा हुआ था |जिसका माथा मथाण (यानी जहा मंदिर स्थापित है )वहा था और जीभा जिया में थी और पंच उसकी नागनी धार में थी | शिवजी ने उसे अपने त्रिशूल से उसके माथे पर वार किया और उसके साथ ही उसे खत्म कर दिया | फिर भी देवी देवताओं को शक हुआ की यह मृत राक्षस भविष्य में फिर से जीवित होगा और फिर से सभी को तंग करेगा | तब भगवान् शिव ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि जब जब भी इसकी शक्ति बढती जाएगी तब तब यहाँ बिजली गिरेगी | इस बिजली को मैं स्वयं पर सेहन करूंगा | मेरे निचे इस राक्षस का शव होगा और इसकी शक्ति क्षीण होती जाएगी |इसके बाद भगवान् शिवलिंग के रूप में यहाँ स्थापित हुए | जब जब भी पृथ्वी पर संकट आता है और इस राक्षस की शक्ति बढ़ने लगती है,तब तब यहाँ बिजली गिरती है | तब तब बिजली महादेव उसको स्वयं पर सेहन करते है | डॉ सूरत के अनुसार इस मंदिर की मान्यता का सबसे बड़ा कारण यही है कि जब भी भगवान शिव ने विषपान किया तो स्वयं को सहन किया लेकिन किसी और को नुकसान नहीं पहुंचाया वैसे ही यहां होता है | बेशक यहाँ मंदिर बाद में बना,लेकिन शिवलिंग पुराना है |जब जब बिजली यहां गिरी तो यहां बने मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा |भगवान बिजली महादेव ने स्वयं उसे अपने ऊपर ग्रहण किया यह सबसे बड़ा चमत्कार है |
ब्रह्मांड पुराण में इस मंदिर का जिक्र
देव संस्कृति के जानकार ताराचंद के मुताबिक कौलंतक पीठ के छोर पर यह बिजली महादेव का मंदिर स्थापित है| यह मंदिर इतना प्राचीन है कि इस बात का अंदाजा ग्राम ब्रह्मांड पुराण से लगा सकते हैं | ब्रह्मांड पुराण में इस मंदिर का जिक्र किया गया है कि यह जालंधर से उत्तर पूर्व हेमकुंड तो पर्वत से दक्षिण में स्थित है और इसके उत्तर में बिपाशा और पूर्व में पशुपति शिव जो बिजली महादेव यहां पर बार-बार आसमानी बिजली गिरने का चमत्कार देखने को मिलता है |आसमानी बिजली शिवलिंग पर गिरती है तो शिवलिंग खंडित होता है जिसे पुजारी मक्खन से जोड़कर पुराने अस्तित्व में लाता है |यदि कोई टुकडा रह जाता है तो पुजारी को स्वपन में आदेश होता है कि यह टुकड़ा कहां गिरा है उसे ढूंढ कर शिवलिंग में जोड़ा जाता है | इस की खास बात यह है कि पूरे भारतवर्ष में एकमात्र यही मंदिर है जहां मक्खन का शिवलिंग स्थापित है और यह मक्खन ना कभी खराब होता है और ना गर्मियों में यह पिघलता है |
जब कोई पृथ्वी पर संकट आना होता है तब गिरती है यहां बिजली
बिजली महादेव के पुजारी गगन शर्मा के अनुसार जब पृथ्वी पर कोई भारी संकट आना होता है तो भगवान आकाशीय बिजली द्वारा उसे अपने ऊपर ले लेते हैं | इसके बाद उसे विधि विधान विधान से मक्खन से जोड़ा जाता है |गाय का जो पहला मक्खन होता है, उससे शिवलिंग को पुनः जोड़ा जाता है | गांव से मक्खन लाया जाता है |बिजली गिरने का कोई निश्चित समय नहीं है जब जब कोई पृथ्वी पर संकट आना होता है तब तक यहां बिजली गिरती है आज तक यहां गिरने वाली बिजली किसी को नुकसान नहीं पहुंचा है |
