बिलासपुर : सुभाष ठाकुर- हिमाचल का एक ऐसा अनोखा शिव धाम जिसका निर्माण पांडवों के द्वारा अज्ञातवास के दौरान किया गया था । हिमाचल और पंजाब सीमा के साथ महाकालेश्वर मंदिर जिसका आगे का हिस्सा पंजाब में आता है और पीछे का हिस्सा हिमाचल प्रदेश में आता है ।
मंदिर का निर्माण पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान किया था
जी हां महाकालेश्वर मंदिर दडोली श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र है। पंजाब, हिमाचल , हरियाणा , दिल्ली और अन्य प्रदेशों से काफी संख्या में श्रद्धालु शिवरात्रि के पावन उपलक्ष पर महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। यह मन्दिर प्राचीन भी है और ऐतिहासिक भी है । बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान किया था। इस मंदिर की बात करें तो यह मंदिर हिमाचल और पंजाब सीमा पर भानुप्ली कस्बे के साथ ऊंची पहाड़ियों के बीच में विद्यमान है।
दोनों राज्यों द्वारा दी जाती है बिजली
इस मंदिर में जहां पर शिव भोलेनाथ के दर्शन है । वहीं पर गणेश और पार्वती माता की मूर्ति स्थापित की गई है साथ में मंदिर की परिक्रमा में दुर्गा माता काली माता और वीर हनुमान जी के मूर्तियां भी स्थापित की है । इस मंदिर का आगे का हिस्सा जिला रोपड़ पंजाब में पड़ता है जबकि पीछे का हिस्सा हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर में पड़ता है और मंदिर में दोनों ही राज्यों के द्वारा बिजली की आपूर्ति भी बहाल की गई है। इस प्राचीन मंदिर में शिवरात्रि के पावन उपलक्ष पर और श्रावण के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है।
