राकेश, ऊना: ऊना जिला की स्वां नदी पर माइनिंग के लिए लगाई गई रोक से रेत के दामों में बढ़ोतरी हुई है। रेत के दाम बढ़ने से अब परेशानी सरकारी कांट्रेक्टर को उठानी पड़ रही है। उन्हें बढ़ी हुई कीमत रेत खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्वां नदी पर 1 जुलाई से 15 सितंबर तक पाबंदी लगाए जाने के बाद रेत के मूल्यों में हुआ इजाफा।
माइनिंग विभाग की माने तो बरसात के समय में रॉ मैटेरियल भारी मात्रा में नदी में आता है इसलिए माइनिंग करने पर पाबंदी लगाई गई है। वहीं इस पाबंदी का असर भी धरातल पर देखने को मिल रहा है। सरकार के विकास कार्यों में लगे सरकारी ठेकेदार माइनिंग पर लगाए गए प्रतिबंध को गलत बता रहे है। कांट्रेक्टर की माने तो उन्होंने सरकारी विभागों में टेंडर लिए हुए हैं और विकास कार्यों में रेत इस्तेमाल होता है। बरसात के समय में नदी पर माइनिंग करने पर पाबंदी लगाए जाने के कारण उन्हें महंगे दामों पर रेत खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। पहले रेत की ट्राली एक हजार रुपए के करीब मिलती थी लेकिन माइनिंग पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण उसके दाम काफी ज्यादा बढ़ गए हैं और उन्हें अब एक ट्रॉली 1500 से ज्यादा की खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
ठेकेदारों को इसका असर उनके बजट पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा की सरकारी कार्यों को समय पर पूरा करना होता है ऐसे में उन्हें महंगे दामों पर ही रेत और बजरी को खरीदना पड़ता है ,जिस कारण कम दाम में लिया हुए काम में जहां उनको ठीक-ठाक मुनाफ़ा होना था वह मुनाफ़ा कई गुना कम हो जाता है ।
वहीं नीरज कांत माइनिंग अधिकारी ऊना ने बताया की स्वां नदी की रिवर बेड में 1 जुलाई से लेकर 15 सितंबर तक माइनिंग करने पर पाबंदी लगाई गई है। माइनिंग विभाग का रेत के मूल्यों पर कोई कंट्रोल नहीं है। विभाग माइनिंग लीज होल्डर से 80 रुपए टन रॉयल्टी लेता है। विभाग की ओर से माइनिंग के मामलों को लेकर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने अवैध रूप से की जा रही माइनिंग के मामले में पिछले साल 329 चालान कर 42 लाख रुपए जुर्माना वसूला था। वहीं इस साल अभी तक 186 चालान और 37 लाख रुपए जुर्माना वसूल कर सरकारी खाते में जमा करवाया गया है।
