Mandi, Dharamveer-विश्वकर्मा चौक के पास लोक निर्माण विभाग द्वारा रॉक बोल्टिंग तकनीक से बनाया गया करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत का डंगा महज एक महीने में ही दरक गया है। डंगे के क्षतिग्रस्त होते ही आसपास के पांच घरों पर फिर से खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
गौरतलब है कि 14 अगस्त 2023 को हुए भूस्खलन में इस क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद करीब दो वर्षों तक प्रशासन ने तिरपाल बिछाकर इलाके को सुरक्षित रखा। मार्च 2025 में यहां रॉक बोल्टिंग तकनीक से डंगा लगाने का कार्य शुरू हुआ, जो मई 2025 में पूरा हुआ।हालांकि निर्माण कार्य करने वाली कंपनी ने दावा किया था कि यह डंगा कई वर्षों तक सुरक्षित रहेगा, लेकिन बरसात की पहली दस्तक में ही इसकी पोल खुल गई।
स्थानीय निवासियों नरेंद्र राणा और राणा रणपत सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान कंपनी ने दावा किया था कि यह तकनीक स्थायी समाधान है। लेकिन डंगे के दरकते ही फिर से उनका घर खतरे में आ गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा इंतजाम और कंपनी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
डेढ़ साल बाद लौटे थे घर, अब फिर बेघर होने का डर
प्रभावित परिवारों में से धीरज महाजन और अनीता ने बताया कि डंगा बनने के बाद ही वे डेढ़ साल के बाद वापस अपने घर लौटे थे और घर की मरम्मत कर बसने की कोशिश की थी। अब फिर से उन्हीं हालातों का डर सताने लगा है।
अधिशाषी अभियंता का कहना ये
लोक निर्माण विभाग मंडी मंडल के अधिशाषी अभियंता ई. डीके वर्मा ने बताया कि अब तक कंपनी को इस कार्य का कोई भुगतान नहीं किया गया है। डंगा क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही कंपनी को मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जो मंगलवार से कार्य शुरू करेगी। प्रारंभिक जांच में पानी के रिसाव को क्षति का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसे अब स्थायी रूप से ठीक किया जाएगा।
