अनिल कुमार, किन्नौर: किन्नौर से ड्रोन के माध्यम से सेब और आलू उठाने का ट्रायल सफल हो गया है। अब जल्द ही किन्नौर जिला के सेब और आलू ड्रोन के माध्यम से मंडी तक पहुंच सकते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसी एक जनसभा में किन्नौर के आलू ड्रोन से मंडी तक पहुंचाने की बात कही थी। लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे असंभव कहकर उनकी बात को मजाकिया रूप में लिया था, लेकिन यह बात सच साबित हुई है। किन्नौर के निचार गांव में ड्रोन के माध्यम से सेब ढोने का काम शुरू कर दिया गया है।

बता दें कि किन्नौर जिला सेब बहुल क्षेत्र है जहां करीब 35 से 36 लाख सेब की पेटी हर वर्ष सेब मंडियों तक कठिन मार्गों से ट्रक में सफर कर पहुंचाए जाते हैं। इस दौरान सेब की पैकिंग फसल को मंडी तक पहुंचाने में कई दिन लग जाते हैं या फिर जिला के सेब को दूरदराज बगीचों से सेब को सड़कों तक पहुंचाने में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहीं सड़क नहीं तो कहीं सड़कों की हालत खस्ता है। समय पर सेब मंडी तक नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में लोगों को सेब के अच्छे दाम भी नहीं मिल पाते है, लेकिन अब किन्नौर के सेब ओर आलू व अन्य नकदी फसलों को मंडी या अपने गंत्वयों तक पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी हो सकता है, जिसका ट्रायल पूरे भारतवर्ष मे पहली बार किन्नौर जिला के निचार गांव में सफल हुआ है।
किन्नौर जिला में विग्रो नामक कंपनी ने निचार गांव के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर बागवानों के साथ करीब तीन दिन तक निचार के दुर्घम क्षेत्र कंडे से लेकर गांव तक सेब से पैक पेटियों को ड्रोन के माध्यम से करीब 10 से 12 किलोमीटर तक भेजने कक ट्रायल चलाया था जो सफल हुआ है। अब यह ट्रायल सफल होने के बाद हिमाचल के अन्य सेब बहुल क्षेत्र के लोगों के लिए भी अच्छी खबर है कि भविष्य में बागवानी क्षेत्र में बड़ी क्रांति आने वाली है। क्योंकि हिमाचल के बागवानी क्षेत्र में आधुनिकरण से लोगों को कई बेहतर सुविधाएं मिली है, जिससे बागवानों के काम आसान हुए हैं। अब ड्रोन के माध्यम से किन्नौर के दुर्गम व कठिन क्षेत्रों से सेब, आलू व अन्य नकदी फसलों को आसान तरीके से गंत्वयों तक भेजा जा सकता है।
ड्रोन से सेब के अलावा दूसरे भी प्रयोग किए जा सकते है। खासकर पर्यटन के क्षेत्र में ऊंचाई वाले दुर्घम इलाकों में सामान पहुंचना कठिन है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दवाइयां भेजना, बर्फबारी में लोगों तक आपात परिस्थिति में मदद इत्यादि भेजना व कई अन्य कार्य किए जा सकते हैं। निचार के सेब बागवान, मनोज माथस, गोविंद नेगी, रमेश नेगी व पंचायत उपप्रधान बलवीर नेगी ने बताया कि इस ड्रोन से सेब के करीब 12 से 18 किलो की सेब पेटियों को 10 से 12 किलोमीटर की दूरी से हवाई मार्ग के छोटे मार्ग से गंतव्य तक पहुंचाकर एक इतिहास रच दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किन्नौर के आलू को ड्रोन से मंडी तक पहुंचाने वाली बात को भी सिद्ध कर दिया है, जिससे भविष्य में बागवानों को कम खर्चे में सेब को अपने गंत्वयों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा।
ड्रोन इजात करने वाले विग्रो कंपनी के प्रबंधक दिनेश नेगी ने कहा कि निचार ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों व सेब बागवानों के समक्ष ड्रोन के माध्यम से सेब के बड़ी पेटी जिसका वजन करीब 12 से 18 किलो ग्राम होता है। उसे निचार के छोत कंडा से निचार मिनी स्टेडियम तक ड्रोन से उठाकर लाया गया। इसमें करीब 6 मिनट का समय लगा है, जबकि कंडे से स्टेडियम तक आम आदमी एक सेब की पेटी को 4 से 5 घंटे तक पहुंचता है, जिसे ड्रोन मिनटों में पहुंचा सकता है। अब जल्द ही इससे बड़ा ड्रोन जिसकी क्षमता 4 पेटी उठाने की हो उसे भी किन्नौर व हिमाचल के अन्य क्षेत्रों में ट्रायल कर बागवानों को ड्रोन खरीददारी शुरू करने के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ड्रोन से सेब ढोने की प्रक्रिया 11 नवंबर से शुरू हुई थी जिसका ट्रायल 14 नवंबर को पूरी तरह सफल हुआ है।
