नूरपुर: पशुचारे के लिए खेतों में चरी ओर बाजरा उगाने के लिए नूरपुर विधानसभा के किसानों ने महंगे दामों पर बीज तो कृषि विभाग से ले लिया लेकिन अब उन्हें पैदावार बेहतर क़िस्म की नहीं मिल पा रही है। ऐसे में किसानों का कहना है कि विभाग की ओर से उन्हें घटिया क्वालिटी का बीज मुहैया करवाया गया है यही वजह है कि उन्हें इसका बेहतर रिजल्ट नहीं मिला है।
जिन किसानों नेज्यादा पशुचारे पैदावार की आशा से कृषि विभाग की ओर से ऊंचे दामों पर दिए जा रहे बीज ख़रीदे थे वह अब अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है।
नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के जसूर के छतरौली निवासी कमल सिंह, स्वर्ण सिंह, अश्विनी शर्मा आदि ने बताया कि पशु चारे वाले बाजरे के बीज के प्रति बैग जो कि 5 किलो था सरकारी विभाग से उन्हें 500 रुपए की दर से ओर चरी के बीज को 150 रुपए प्रति किलो की दर से कृषि विभाग ने मुहैया करवाया है। आमतौर पर इस बीज से तैयार पशुचारे से कई बार फसल तैयार होती है ओर अनेक बार इसे किसान पशुओं के चारे के लिए काट कर इस्तेमाल करता है, जबकि इस बार किसानों की ओर से इस बीज से पहली कटाई करने के बाद अगली बार के लिए यह विकसित ही नहीं हो पाया है। अगर कहीं उगा भी है तो वो भी नाम मात्र ही उग पाया है।
किसानों का कहना है कि जो बीज विभाग से ना लेकर उन्होंने बाहर बाज़ार से दूकानों से लिया है उससे उन्हें अच्छी पैदावार मिली है और वह बीज अच्छी गुणवत्ता वाला है। किसानों का कहना है कि जहां सरकारी विभाग से प्राप्त बीज का दाम 100 रुपए प्रति किलो था तो बाजार से में इसका दाम 60 रुपए प्रति किलो था ओर इस बाजारी बीज से तीन बार बाजरे की कटाई प्राप्त हुई है। किसानों को शक है कि नेशनल सीड कारपोरेशन के बैग में कृषि विभाग के माध्यम से सब्सिडी पर यह बीज घटिया व नकली किस्म का था जिसे किसानों को बेच कर उनके साथ धोखा किया गया।
किसानों में मांग की है कि कृषि विभाग से मिले इस महंगे लेकिन बेकार साबित हुए बीज की क्वालिटी की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए । इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। वहीं कैप्टन सुरेश पठानिया अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि यदि बाजार से प्राप्त बीज से पशु चारे की बेहतर फसल का उत्पादन हुआ है तो इस बीज को भविष्य में किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा।
