कुल्लू/मनमिन्द्र अरोड़ा: विश्व के सबसे बड़े देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्व में सोमवार को ढालपुर मैदान पहुंचे सभी देवी-देवताओं ने रघुनाथ जी के अस्थाई शिविर में जाकर हाजरी भरी। यही नहीं सभी देवी-देवताओं का रघुनाथ जी के रजिस्टर में बाकायदा एंट्री होने के बाद अठारह करोड़ देवी-देवताओं का देव महामिलन हुआ।

इस देव महामिलन को कहते हैं मुहल्ला
इस देव महामिलन को मुहल्ला कहते है। इसके पश्चात देवी-देवताओं के दशहरा पर्व में सोमवार देर रात रघुनाथ के दरबार में शक्ति का आह्वान होगा। दशहरा पर्व में इस शक्ति आह्वान को विधिवत रूप से किया जाएगा। मुहल्ला पर्व में सबसे पहले देवी हडिंबा माता फूलों का गुच्छा जिसे शेश कहा जाता है। उसके मिलने पर ही मुहल्ला पर्व शुरू होता हैं। मुहल्ला पर्व में रघुनाथ के पुजारियों ने बाकायदा देवताओं के नाम रजिस्टर में दर्ज किए। इसमें सबसे पहले हिडिंबा देवी का नाम दर्ज होता है। इस दौरान देवी-देवता राजा की चानणी के पास भी हाजरी देते हैैं और देवी-देवताओं से लिया गया फूल रूप में प्रसाद राज गद्दी पर बिठाए जाएँगे तथा राजा अपनी राजगद्दी को छोड़कर साधारण कुर्सी पर बैठेगेंं। वहीं देर रात को शक्ति का आह्वान होता है।

इस दिन लंका पर विजय के लिए शक्ति से रक्षा की अपील की जाती है
परंपरा के अनुसार शक्ति रूपी ब्राह्मण रघुनाथ जी के समक्ष शेर की सवारी में नंगी तलवार से नाचते हुए अढ़ाई फेरे लगाती है। इस दिन लंका पर विजय के लिए शक्ति से रक्षा की अपील की जाती है। कुल्लू दशहरा पर्व अनूठी परंपरा का संगम है। शेष विश्व में दशहरा पर्व समाप्त होता है तथा कुल्लू में शुरू होता है। इसके पीछे धारणा यह है कि रावण पूर्णिमा के दिन मारा गया था। इसलिए कुल्लू का दशहरा पर्व पूर्णिमा से सात दिन पहले शुरू होता है तथा सातवें दिन लंका दहन में रावण को परंपरा अनुसार भेदा जाता है। बहरहाल छठे दिन कुल्लू के समस्त देवी-देवता रावण का सफाया करने के लिए मुहल्ला में एकत्र होते हैं और शक्ति का आह्वान करके सातवें दिन लंका पर चढ़ाई करेगें।

