चंद्रिका -हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला में हाटू मन्दिर 3400 मीटर की ऊंचाई पर बना विशालकाय देवदार के पेड़ों के बीच स्थित है। यहां काफी संख्या में पर्यटक व स्थानीय लोग मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं । इस मंदिर से राजों और रजवाड़ों का पूर्वजों के समय से खास लगाव रहा है । हाटू मन्दिर कुमारसैन, रामपुर, ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू सहित प्रदेश, दूसरे प्रदेशों और विदेशों में भी आस्था का प्रतीक है।
शिमला से हाटू मंदिर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर
है । ये जगह हाटू पीक से विश्वभर में प्रसिद्ध है ।माना जाता है कि यह मंदिर पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय बनाया था , जिसका प्रमाण आज भी यहां मिलता है। कहा जाता है कि यहां पर आज भी अगर खुदाई की जाए तो जला हुआ कोयला मिलता है। जो इस बात का प्रमाण दर्शाता है कि पांडव की इस जगह पर एक रसोई भी हुआ करती थी और वे इस जगह पर खाना बनाया करते थे। बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच आज भी यहां कोयला मिलता है। नवनिर्माण हुए इस मंदिर में प्राचीन कला की अद्भुत आकृतियां उकेरी गई है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।मन्दिर के रखरखाव व इसकी सुंदरता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए कमेटी का गठन किया गया है जो हर समय मन्दिर की व्यवस्था देखती है।
ये भी है मान्यता..रावण की पत्नी मंदोदरी ने बनवाया था मंदिर
मंदिर को लेकर ऐसी भी मान्यता है कि इसे लंकानरेश रावण की पत्नी मंदोदरी ने बनवाया था ।यहां से लंका बहुत दूर थी लेकिन मंदोदरी हाटू माता की बहुत बड़ी भक्त थी और वे यहां हर रोज पूजा करने आया करती थीं ।इस मंदिर के चारों ओर लकड़ी के पटल हैं, जिन पर रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों की कथाएं दर्शायी गयी हैं; जैसे कि रामायण का भरत मिलाप का दृश्य. अन्य तख्तों पर हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ शुभ और मंगल चिह्न उत्कीर्णित किए गए हैं, जैसे कि स्वातिक का चिह्न है ।
