संजीव महाजन,नूरपुर: बीजेपी के आलाकमान ने कांगड़ा ओर चंबा संसदीय क्षेत्र की बीस विधानसभा क्षेत्रों में टिकट आबंटन में ब्राह्मणों की अनदेखी कर एक भी ब्राह्मण को टिकट ना देकर ब्राह्मण समुदाय में बैचेनी पैदा कर दी है। ब्राह्मणों की इस अनदेखी का खामियाजा इन चुनावों में बीजेपी को भुगतना होगा। यह बात प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा ने जसूर में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
उन्होंने भाजपा सरकार को ब्राह्मण विरोधी सरकार बताया और कहा कि क्या कांगड़ा ओर चंबा में किसी भी ब्राह्मण नेता को बीजेपी की आलाकमान ने योग्य नहीं समझा ? उन्होंने कहा की शांता कुमार की 2007 के उपरांत राजनीति में अनुपस्थिति से क्या बीजेपी में कांगड़ा,चंबा संसदीय क्षेत्र की बीस विधानसभा क्षेत्रों में ब्राह्मण समुदाय का वोट बैंक कम हुआ है या यह की ब्राह्मण समुदाय के किसी भी नेता को प्रथम पंक्ति में पहचान न देना भाजपा की राजनीतिक मजबूरी हो।
उन्होंने कहा कि कारण कोई भी रहा हो ब्राह्मण समुदाय की कांगड़ा, चंबा में टिकट वितरण में अनदेखी आलाकमान की सोची समझी राजनीतिक साज़िश तो नहीं है, जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना होगा। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समुदाय पूर्णतया कांग्रेस पार्टी की तरफ़ रुझान बना चुका है क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने कांगड़ा, चंबा संसदीय क्षेत्र में बीस विधानसभा क्षेत्रों में पांच ब्राह्मण नेताओं पर विश्वास व्यक्त करके उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है।
सुदर्शन शर्मा ने कहा की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी टिकट आवंटन में अन्य जिलों को अधिमान देते रहे, लेकिन ज़िला कांगड़ा व चंबा की पूर्णतया अनदेखी कर उन्होंने राजनीतिक संकीर्णता का परिचय दिया है। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा की प्रश्न यह उठता है कि सबसे बड़े ज़िले कांगड़ा से यदि पूर्व मंत्री मेजर विजय मनकोटिया शाहपुर से बीजेपी में ले सकते हो तो पूर्व मंत्री डॉक्टर राजन सुशांत को बीजेपी में लेने में कटुता क्यों? क्या मनकोटिया से अधिक कटु वचन बीजेपी के प्रति डॉक्टर.राजन सुशांत ने व्यक्त किए है ? यह सभी तथ्य दर्शाते है कि कांगड़ा ओर चंबा में बीजेपी ब्राह्मण समुदाय के विरोध में है ओर ब्राह्मणों का यह तिरस्कार बीजेपी को नुक़सानदायक होगा।
उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस चुनाव में जहां ब्राह्मणों के तिरस्कार का परिणाम भुगतना होगा तो वहीं उन्हें कर्मचारियों की बेरुखी का भी सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि राजनीति का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि सरकारी कर्मचारी ही राजनीति का करुणानिधान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारी अपनी अधिकतम हाजिरी दर्ज करता है और प्रदेश की राजनीति में उलटफेर के लिए काफी हद तक असरदार है। इस मर्तबा ओपीएस वर्ग का मुद्दा निर्णायक सिद्ध होगा, जिसका सीधा-सीधा लाभ कांग्रेस पार्टी की दस गारंटी में शामिल ओपीएस बहाली की गांरटी को मिलेगा।
