Shimla,25 April(TSN)-आज शिमला के बचत भवन सभागार में जिला स्तरीय बैंक सलाहकार समिति और समीक्षा बैठक आयोजित की गई,जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की।इस अवसर पर उपायुक्त ने बैंकों को निर्देश दिए कि वे शिक्षा ऋण मामलों को प्राथमिकता दें ताकि छात्रों की उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाएं कम हो सकें।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना जैसी सरकारी पहल की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाई जानी चाहिए।
बैठक में उन्होंने वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव और जन-जागरूकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि बैंकों के सहयोग से चलाए जा रहे शिविरों में न केवल वित्तीय साक्षरता बढ़े,बल्कि स्वरोजगार को भी प्रोत्साहन मिले।
क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार
बैठक में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, जिले की क्रेडिट-डिपॉजिट दर 41.42 प्रतिशत से बढ़कर 42.57 प्रतिशत हुई है। तिमाही विश्लेषण में यह पाया गया कि बैंकिंग क्षेत्र में कुल जमा राशि में 1.18%, अग्रिमों में 3.99%, और एमएसएमई सेक्टर में 5.80% की वृद्धि हुई है।शिक्षा ऋण में 2.96% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि आवास ऋण में 0.73% की गिरावट आई।
स्वयं सहायता समूहों को बड़ी सहायता
बैठक में जानकारी दी गई कि 597 स्वयं सहायता समूहों को कुल 17.08 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके साथ ही,प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कुल 13,606 लाभार्थियों को शिशु, किशोर और तरुण श्रेणियों में ऋण प्रदान किए गए।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में सहभागिता
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना के अंतर्गत लाखों लोगों को जोड़ने की जानकारी बैठक में दी गई।
प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
ग्रामीण आत्म स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान और क्रेडिट काउंसलिंग सेंटर के सहयोग से 698 लोगों को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें अधिकांश महिलाएं शामिल हैं और उन्हें मधुमक्खी पालन, ब्यूटी पार्लर, फास्ट फूड स्टाल, टेलरिंग, ज्वैलरी आदि में प्रशिक्षित किया गया।
नए वित्त वर्ष के लिए 10003.57 करोड़ का ऋण लक्ष्य
उपायुक्त ने आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जिला ऋण योजना का उद्घाटन किया,जिसमें प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए कुल 9053.97 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कृषि,एमएसएमई,शिक्षा,आवास और अन्य क्षेत्रों को विशेष वरीयता दी गई है।
उपायुक्त ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे समर्पण के साथ कार्य करें ताकि योजनाएं ज़मीन पर उतर सकें और ज़िला आर्थिक रूप से और अधिक मज़बूत बन सके।
