मंडी,धर्मवीर (TSN)- कहतें है एक शिक्षक उस दीपक के समान होता है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशित करता है। लेकिन आज हम जिस अध्यापक की बात करने जा रहें है वह बच्चों को शिक्षित कर अपना शिक्षक धर्म तो बखूबी निभा रहा ही हैं और साथ ही अपनी नेक कमाई को जरूरतमंद बच्चों के ऊपर भी लुटा रहा है।
जेबीटी शिक्षक प्यार चंद सकलानी स्कूल के बच्चों का माता-पिता की तरह रख रहे खास ख्याल
इस शिक्षक का नाम प्यार चंद सकलानी है और मंडी जिला के चौहारघाटी के तहत पड़ने वाले शिक्षा खंड द्रंग-2 के राजकीय प्राथमिक पाठशाला गढगांव में अपनी सेवाएं दे रहा है। पिछले महीनें जब क्षेत्र में सर्दियां बढ़ी तो जेबीटी शिक्षक प्यार चंद सकलानी ने पहले अपनी नेक कमाई से स्कूल के सभी बच्चों को गर्म जूते और जुराबें प्रदान की वहीं अब प्यार चंद सकलानी ने स्कूल की दो जरूरमंद बच्चियों को ट्रैक सूट और स्कूल बैग भेंट किए। यह दोनों बच्चियां सगी बहनें हैं और स्कूल में तीसरी व चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रहीं है।
चौहरघाटी में बर्फबारी के चलते सर्दियों में पड़ती है कडाके की ठंड
बता दें कि दं्रग विधानसभा की चौहारघाटी में सर्दियों के मौसम में बर्फबारी होने के बाद कड़ाके की ठंड पड़ती है। द्रंग विधानसभा के तहत आने वाली चौहार घाटी जिला का अति दुर्गम इलाका भी है। प्यार चंद सकलानी पिछले दो सालों से चौहार घाटी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला गढगांव में अनुबंध आधार पर बतौर जेबीटी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस स्कूल में प्यार चंद सकलानी की पहली पोस्टिंग है। सकलानी ने बताया कि जिन दो बच्चियों को स्कूल बैग व ट्रैक सूट भेंट किए गए हैं, वह दोनों ही स्कूल की होनहार छात्राएं है। कुछ साल पहले उनकी मां का देंहात हो गया है। उनकी पढ़ाई में कोई वादा न आए यह सोचकर उन्होंने बच्चियों की मदद की है। यही नहीं समय-समय पर स्कूल के अन्य बच्चों की भी मदद करते रहते हैं। इस समय स्कूल में कुछ 14 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो गरीब घरों से संबंध रखते हैं।
वहीं जेबीटी अध्यापक प्यार चंद सकलानी ने समाज के अन्य लोगों से भी जरूरमंद स्कूली बच्च्चों की मदद की गुहार लगाई है। बता दें कि प्यार चंद सकलानी जोगिंद्रनगर उपमंडल के तहत पड़ने वाली पंचायत रोपा पधर के बनेड़ गांव के निवासी है। इनके दो और भाई हैं और वे भी बतौर जेबीटी अध्यापक अपनी सवाएं दे रहें हैं। प्यार चंद सकलानी ने बताया तीनों भाई जहां सरकारी स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहें है, वहीं अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में ही शिक्षा ग्रहण करवा रहें है।
