Shimla,Sanju -:राजधानी शिमला में व्यापारियों के बीच इन दिनों माहौल गर्माता जा रहा है। शहर के विभिन्न बाजारों में व्यापार मंडल के चुनाव को लेकर जोरदार हलचल मची हुई है। जानकारी के अनुसार, शिमला व्यापार मंडल का कार्यकाल करीब एक वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक नए चुनाव नहीं करवाए गए हैं। इसी कारण व्यापारी अब सक्रिय रूप से चुनाव की मांग कर रहे हैं और इसे लेकर शहरभर में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है।
यह अभियान शिमला के लोअर बाजार, लक्कड़ बाजार, माल रोड और राम बाजार सहित कई इलाकों में चलाया जा रहा है। व्यापारी दुकानदारों से समर्थन जुटा रहे हैं ताकि सामूहिक रूप से प्रशासन पर चुनाव करवाने का दबाव बनाया जा सके। व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा संगठन निष्क्रिय हो चुका है, जिससे व्यापार से जुड़ी कई समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी पड़ी हैं।इसी बीच लोअर बाजार के व्यापारियों ने अलग से स्वतंत्र व्यापार मंडल बनाने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि जब माल रोड, लक्कड़ बाजार और राम बाजार पहले ही अपने अलग मंडल बना चुके हैं, तो लोअर बाजार को भी अपना प्रतिनिधि संगठन होना चाहिए, ताकि स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।
पूर्व प्रधान इंद्रजीत सिंह का कहना ये
पूर्व प्रधान इंद्रजीत सिंह ने बताया कि व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त हुए एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन चुनाव न होने के कारण संगठन पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की कई समस्याएं — जैसे पार्किंग, सफाई व्यवस्था, टैक्स से जुड़ी दिक्कतें और त्योहारों के समय ट्रैफिक नियंत्रण — लगातार बढ़ती जा रही हैं, परंतु कोई उन्हें सुनने वाला नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तुरंत चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि नया प्रतिनिधि मंडल बन सके और व्यापारिक हितों की रक्षा हो सके।चुनाव न होने से व्यापारियों की आवाज दब गई है। अगर प्रशासन जल्द चुनाव नहीं करवाता, तो हमें आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
दूसरी ओर, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पुराने संगठन की निष्क्रियता से उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। व्यापारिक समस्याओं का समाधान न होने से बाजारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सभी बाजारों के व्यापारी अब एकजुट होकर एक ही मांग उठा रहे हैं — कि शिमला व्यापार मंडल के चुनाव शीघ्र करवाए जाएं, ताकि सक्रिय नेतृत्व के तहत व्यापारियों की आवाज सरकार तक पहुंच सके और उनके हित सुरक्षित रह सकें।
