मंडी (एकता): हिमाचल में चुनाव पर राजनीति सियासत काफी चरम पर है। 68 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है। बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी सीटों पर चुनावी मुकाबला पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा रोचक माना जा रहा है। कांग्रेस और बीजेपी ने चुनावों के चलते कमर कस ली है। वहीं हिमाचल प्रदेश के बड़े राजनीतिक चेहरों में से एक अनिल शर्मा के राजनीति सफर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। अनिल शर्मा का जीवन में काफी लंबे समय से उतार-चढ़ाव वाला रहा। उन्होंने अपने सफर में काफी मुश्किलें तय की। कांग्रेस पार्टी में रहने के बावजूद उन्होंने काफी मुश्किलें झेली। बता दें कि हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट पर साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अनिल शर्मा ने जीत हासिल की थी। अब अनिल शर्मा ने पूरे परिवार सहित बीजेपी का दामन थाम लिया है।
जानिए अनिल शर्मा का राजनीति सफर
अनिल शर्मा का जन्म 30 जून, 1956 को कुल्लू जिला के सुल्तानपुर में हुआ। इनके पिता पण्डित सुखराम भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने शिमला व चण्डीगढ़ से अपनी पढ़ाई की। उन्होंने इलाहाबाद कृषि संस्थान से डेरी टेक्नोलॉजी में बी.एस.सी. की। अनिल शर्मा नवम्बर, 1993 में प्रथम बार राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और हिमाचल प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (युवा सेवाएं, खेल एवं वन) बने। साल 1998-2004 तक राज्य सभा के सदस्य रहे और इस दौरान सदन की रेलवे, खाद्य आपूर्ति एवं लोक वितरण समितियों, संचार मंत्रालय तथा संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित कंसलटेटिव समितियों के सदस्य रहे। दिसम्बर, 2007 में प्रदेश विधानसभा के लिए पुन: निर्वाचित हुए। उन्होंने साल 2012 में 12वीं विधानसभा के लिए मण्डी सदर विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार निर्वाचित होकर आए। हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट पर साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अनिल शर्मा ने जीत हासिल की थी। अब अनिल शर्मा ने पूरे परिवार सहित बीजेपी का दामन थाम लिया है।
बीजेपी में पूरे परिवार सहित हुए शामिल
पिछले लंबे समय से अनिल शर्मा और बीजेपी के बीच एक असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। पिता सुखराम और बेटे आश्रय शर्मा के कांग्रेस में जाने के बाद अनिल शर्मा और बीजेपी के रिश्तों में एक दरार सी आ गई थी। लेकिन किस्मत ने उन्हें फिर एक कर दिया। अनिल शर्मा ने भाजपा के साथ एकजुट होकर साथ चलने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पीएम की रैली के दौरान कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और भविष्य में भी पार्टी के साथ मिलकर कार्य करेंगे।
जानिए अनिल शर्मा ने क्यों छोड़ी थी कांग्रेस
अनिल शर्मा देश के पूर्व टेलीकॉम मंत्री और हिमाचल के कद्दावर नेता रहे पंडित सुखराम के बेटे हैं। 1993 में पहली बार मंडी सीट से विधायक बने अनिल शर्मा अब तक कुल चार बार विधानसभा पहुंच चुके हैं। 2012 में वीरभद्र सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे अनिल शर्मा ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का कमल थाम लिया। अनिल शर्मा चुनाव भी जीत गए लेकिन बीजेपी के समीकरण साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले तब बिगड़ गए। जब अनिल शर्मा के पिता पंडित सुखराम और बेटे आश्रय शर्मा ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। बीजेपी से टिकट नाम मिलता देख दादा ने पोते के लिए कांग्रेस का दामन थाम लिया था। आश्रय शर्मा को कांग्रेस ने मंडी लोकसभा से टिकट दिया और आश्रय शर्मा चुनाव हार गए।
