भावना शर्मा: हिमाचल के कांगड़ा जिला के बनखंडी में स्थित मां बगलामुखी मंदिर बेहद प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर में लोग शत्रुओं और बुरी ताकतों का नाश करने के लिए हवन यज्ञ करवाते हैं। यह वजह भी है कि मां बगलामुखी को शत्रुनाशिनी मां के रूप में जाना जाता हैं। मां बगलामुखी के मंदिर में श्रद्धालु जहां माता रानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं तो वहीं मंदिर में आकर मुकदमों, विवादों में फंसे और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए विशेष तरह के हवन भी मंदिर में आकर करवाते हैं। इस मंदिर में ना केवल श्रद्धालु हिमाचल बल्कि देश भर से पहुंचते हैं। नेता, राजनेता,अभिनेता तक इस मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए और विशेष हवन करवाने के लिए पहुंचते हैं।
मां बगलामुखी को रावण की इष्ट देवी के रूप में भी पूजा जाता था रावण ने शत्रु का नाश कर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी की पूजा की थी वही जो अब भगवान श्री राम रावण से युद्ध करने के लिए जा रहे थे और उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने भी मां बगलामुखी की आराधना की थी। उसी समय से शत्रुओं के नाश ओर उनपर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी की आराधना श्रद्धालु करते हैं। मंदिर में आने वाले लोगों का तांता यहां लगा रहता हैं और दिनभर मंदिर में हवन यज्ञ चलते रहते हैं।
यह है मंदिर का इतिहास
मां बगलामुखी का हिंदू पौराणिक कथाओं में 10 महाविद्याओं में आठवां स्थान हैं। मान्यता हैं कि मां बगलामुखी की उत्पत्ति ब्रह्मा जी की अराधना के बाद हुई। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का एक ग्रंथ जब राक्षस ने चुरा लिया था और वह ग्रंथ को लेकर पाताल में छुप गया था तो ऐसे में ब्रह्मा जी ने मां भगवती की आराधना की,जिससे मां बगलामुखी की उत्पत्ति हुई। इसके बाद में मां बगलामुखी ने बगुला रूप धारण कर राक्षस का वध किया और वह ग्रंथ ब्रह्मा जी को लौटया था।
पांडवों में एक ही रात में किया था बगलामुखी मंदिर का निर्माण
पुराणिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार है मां बगलामुखी मंदिर की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। इस दौरान पांडवों ने एक ही रात में मां बगलामुखी के मंदिर का निर्माण कर दिया था। इस मंदिर में सबसे पहले अर्जुन और भीम ने ही युद्ध में शक्तियां प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी की विशेष पूजा आराधना की थी। बताया जाता है कि पांडुलिपियों में मां के जिस स्वरूप का वर्णन किया गया है मंदिर में मां उसी सरूप में आज भी विराजमान हैं। मां हल्दी रंग की जल से प्रकट हुई थी। पीले रंग के कारण मां को पीतांबरी देवी भी कहा जाता हैं। यही वजह भी है कि मां को पीला रंग बहुत ज्यादा प्रिय हैं, ऐसे में मंदिर परिसर को पीले रंग में ही रंग गया हैं और मां की पूजा भी पीले रंग के वस्त्र पहनकर ही की जाती हैं। यहां तक कि मंदिर में माता रानी को पीले रंग का प्रसाद यानी बेसन ही चढ़ाया जाता हैं।
हर समस्या के लिए मंदिर में होते हैं अलग-अलग तरह के हवन
मां बगलामुखी के मंदिर में रात दिन हवन यज्ञ होते रहते हैं यहां हर एक समस्या के समाधान को लेकर अलग अलग तरह का हवन किया जाता हैं। मंदिर में पारिवारिक कलह, जमीनी विवाद, मुकदमों में फंसे लोग,वाद विवाद में विजय, वाक् सिद्धि, नवग्रह शांति, रिद्धि सिद्धि प्राप्ति, शत्रु नाश हवन, सर्व कष्टों के निवारण के लिए हवन करवाए जाते हैं। कुछ हवन मंदिर में दिन में किए जाते हैं तो कुछ विशेष तरह के हवन सिर्फ रात्रि समय में ही मंदिर में पुजारियों की ओर से संपन्न किए जाते हैं।
इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति भी आ चुके हैं बगलामुखी के दरबार
मां बगलामुखी के दरबार में आम लोगों के साथ ही नेता राजनेता और अभिनेता भी विशेष पूजा अर्चना करवाने के लिए पहुंचते रहते हैं। मंदिर में प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तांत्रिक अनुष्ठान करवा चुकी हैं। वर्ष 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बगलामुखी मंदिर पहुंची थी और यहां उन्होंने अनुष्ठान करवाया था जिसके बाद वह 1980 में वापस सत्ता में आई और प्रधानमंत्री बनी थी। इसके अलावा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई प्रह्लाद मोदी, सांसद जयाप्रदा, कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर,भूपेंद्र हुड्डा, अमर सिंह, मनवीर सिंह बिट्टा ओर यहां तक कि मौर्य के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने भी अपनी पत्नी कोबिता के साथ है मंदिर में हवन करवाया था। राजनेताओं के अलावा अभिनेताओं में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी अपने पति राज कुंद्रा के साथ मंदिर में हवन करवा चुकी हैं। इसके साथ ही संजय दत्त,राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर, गोविंदा, गुरदास मान, कपिल शर्मा सहित अन्य फिल्मी जगत से जुड़ी हस्तियां भी मंदिर में आ कर हवन यज्ञ करवा चुके है।
