राहुल चावला, धर्मशाला: तिब्बती समुदाय के लोगों के नए साल का जश्न मंगलवार को लोसर पर्व के साथ शुरू हो गया हैं। इस पर्व को तिब्बती समुदाय के लोगों की ओर से बड़ी ही धूमधाम से ओर हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा हैं। इससे पहले कोरोना संक्रमण के चलते तिब्बती अपना नववर्ष का त्यौहार लोसर नहीं मना पा रहे थे, लेकिन अब जब कोरोना संक्रमण में कमी आई हैं और लगभग सभी पाबंदियों को भी समाप्त कर दिया गया हैं,ऐसे में तिब्बती लोग इस वर्ष पूरे जोश से लोसर का त्यौहार मना रहे हैं।
लोसर त्यौहार को लेकर तिब्बती पहले ही अपने अपने घरों में रंग रोगन करवा लेते हैं और लोसर के त्यौहार में विभिन्न प्रकार की मिठाईयां भी बनाई जाती हैं। समुदाय के लोग विशेष पूजा-अर्चना से अपने इस पर्व की शुरुआत करते हैं और पारंपरिक तरीके से लोसर को मनाते हुए नववर्ष का जश्न मनाते हैं।
इस मौके पर निर्वासित तिब्बत की उपाध्यक्ष डोलमा सेरिंग ने कहा कि तिब्बतियों में लोसर एक परंपरा हैं जो पहले सुबह धार्मिक कार्यक्रम से शुरू होती हैं। उसके उपरांत (सीटीए) निर्वासित तिब्बत सरकार के जो अधिकारी हैं वे दलाईलामा मंदिर में आते है और इसी के साथ टिप्पा से तिब्बती स्कूल के बच्चे भी इस मंदिर में आते है और यहां पर नृत्य किया जाता हैं।
उन्होंने बताया कि तिब्बत में एक परंपरा है कि इस पर्व पर छोटे बच्चों की ओर नृत्य किया जाता हैं। उन्होंने बताया कि इस के बाद दो लामाओं की ओर से बुद्ध की शिक्षा पर वार्तालाप की जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिला कांगड़ा में जितने भी तिब्बती मठ है सभी मठों से दो-दो लामा आते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे तो नववर्ष तो सभी का एक ही है लेकिन तिब्बती इस मौके पर एक प्रतिज्ञा करते है कि इस वर्ष आप किस चीज को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में अभी जो कोविड के कारण जिन लोगों की मृत्यु हुई हैं और कोविड संक्रमण के कारण जो दुनिया में अफरा तफरी मची थी उसको लेकर मन की शांति जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मन की शांति बाहर से नहीं मिलती बल्कि अपने आप मन को शांत करना पड़ता हैं।
उन्होंने कहा कि इस मौके पर उन्होंने प्रार्थना की है कि जितना भी चीन और तिब्बत के बीच संघर्ष चल रहा हैं वह वार्तालाप के जरिए सुलझ जाए और सारे विश्व में शांति और भाई चारा बना रहे।
डिपार्टमेंट ऑफ सिक्युरिटी मंत्रालय की मंत्री गेरी डोलमा ने कहा कि आज हम तिब्बतियों के लिए जो लोग तिब्बत में रहते है या जो तिब्बती तिब्बत के बाहर रहते है सभी के लिए नए साल का दिन आज से शरू हो रहा हैं। उन्होंने कहा कि तिब्बतियों का जो कलैंडर है व लूनर कैलेंडर यानी चंद्रमा के हिसाब से कैलेंडर चलता हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हम अपने दिनों को गिनते है तो हमारा कैलेंडर चीन के कैलेंडर से बिल्कुल अलग हैं और पूरे चीन में जो उनका नया साल होता है व हम तिब्बतियों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि भारत की हिमालयन रीजन की बेल्ट के साथ हमारी जो संस्कृति है व चीन से ज्यादा नजदीकी है और आज के दिन अरुणाचल में भी तिब्बतियों की ओर से लोसर को मनाया जाता हैं।
उन्होंने कहा कि जो पूजा अर्चना आज की जाती हैं वह एक देश या केवल एक मानव के लिए नहीं होती अपितु पूरे विश्व मे शांति बनी रहे इस लिए की जाती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने जो प्रार्थना की हैं कि तिब्बत में चीन के अत्याचार के नीचे दबे हुए तिब्बती भाई बहनों के लिए यह नया साल अच्छा रहे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना भारत सरकार और भारत वासियों के लिए भी हैं और उन देशों के लिए भी है जो मानव अधिकारों के लिए और सत्य के लिए खड़े होते हैं।
