विकास शर्मा,चिंतपूर्णी: हिमाचल में विधानसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद हर एक विधानसभा सीट पर चुनाव सरगर्मियां तेज हो गई है। अभी तक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों के नाम फाइनल नहीं किए हैं,लेकिन चुनावी माहौल के बीच विधानसभा सीटों पर हार जीत को लेकर चर्चाओं का बाज़ार भी खूब गर्म है। इस चुनावी माहौल के बीच अगर बात चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र की जाए तो इस क्षेत्र का इतिहास देखने पर पता चलता है कि इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का ज्यादा दबदबा रहा है।
पिछले कुल 10 विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देखा जाए तो इस विधानसभा सीट पर 5 बार कांग्रेस,4 बार बीजेपी और एक बार निर्दलीय को जीत मिली है।1977 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में यहां पर जनता पार्टी के हंसराज 1581 बोर्ड से जीते थे जबकि 1982 के विधानसभा चुनावों में हंसराज अकोट ने 1705 वोटों से पहली बार कांग्रेस को इस विधानसभा क्षेत्र में जीत दिलाई थी। वहीं 1987 में हुए विधानसभा चुनावों में गणेश दत्त फिर कांग्रेस को दूसरी बार विधानसभा की सीट 2025 वोटों से जीते थे।
चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को मिल रही हार को जीत में तब्दील करने के लिए भाजपा ने वर्ष 1990 में महिला प्रत्याशी पर इस विधानसभा क्षेत्र से दाव खेला था। इस सीट से विधानसभा का टिकट सुषमा शर्मा को देने के बाद भाजपा 10 सालों के बाद दोबारा इस विधानसभा सीट पर जीत हासिल कर पाई ओर इस समय जीत का मार्जन 2901 वोट रहा था।
वहीं वर्ष 1993 में आजाद उम्मीदवार हरिदत्त को इस विधानसभा सीट से लोगों ने 5813 वोटो से जीत दर्ज करवाई ओर सभी को चौंका दिया, क्योंकि यह पहली बार था कि कोई आजाद उम्मीदवार इस विधानसभा क्षेत्र से जीता था। इसके बाद 1998 में भाजपा के प्रवीण शर्मा ने 653 वोटों से चिंतपूर्णी विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधायक बने और भाजपा सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। यह पहली बार था जब कोई चिंतपूर्णी विधानसभा से जीता हुआ विधायक कैबिनेट में मंत्री बना। वर्ष 2003 में कांग्रेस के उम्मीदवार राकेश कालिया ने 10941 वोटों से प्रवीण शर्मा को हराया। यह पहली मर्तबा था की इस विधानसभा क्षेत्र में 10000 वोटों से कोई विधायक जीता। इसके बाद वर्ष 2007 में फिर राकेश कालिया ने इस विधानसभा क्षेत्र को 16135 वोटों से जीता।वर्ष 2012 में यह विधानसभा क्षेत्र रिजर्व हो गया ओर कांग्रेस के कुलदीप कुमार ने 437 वोटों से जीत दर्ज कर यहां से विधायक बने और उन्हें वित्त आयोग का चेयरमैन बनाया गया।
इसके बाद वर्ष 2017 में बलवीर चौधरी ने 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को जीत दिलवाई ओर वह विधायक बने। उनकी जीत में 8579 वोटों का मार्जन रहा जो कि चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के किसी विधायक का जीत का सबसे मार्जन था। वहीं अब इस बार वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र की जनता किस राजनीतिक दल और किस राजनेता की झोली में इस सीट को डालती है यह देखने वाली बात होगी।
राकेश कालिया के नाम है सबसे अधिक वोटों से चिंतपूर्णी विधानसभा सीट जितने का रिकॉर्ड पिछले 10 विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक वोटों से जितने का रिकॉर्ड भी कांग्रेस के राकेश कालिया के नाम रहा है। 2007 में फिर से राकेश कालिया ने इस विधानसभा क्षेत्र को 16135 वोटों से जीता। जो कि अपने आप में आज तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है।
