भावना शर्मा: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों समर पर्यटन सीजन की शुरुआत हो चुकी हैं। मैदानी इलाकों में तपती गर्मी से राहत पाने के लिए इन दिनों में हिमाचल के साथ लगते पड़ोसी राज्यों के साथ ही अन्य राज्यों से भी सैलानी पहाड़ों की ठंडी फिजाओं का रुख करते हैं। यही वजह है कि जैसे ही समर सीजन की शुरुआत होती हैं तो पहाड़ों की रानी शिमला भी पर्यटकों से गुलजार हो जाती हैं। जहां पहुंचने के लिए पर्यटकों के पास वैसे तो कई विकल्प हैं लेकिन पर्यटक यहां पहुंचने के लिए विश्व धरोहर कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर चलने वाली टॉय ट्रेन में सफर करने को प्राथमिकता देते हैं।
इस ऐतिहासिक ट्रक पर चलने वाली टॉय ट्रेन आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। यही वजह है कि काफी संख्या में पर्यटक कालका से शिमला और शिमला से कालका तक का सफर इस ट्रैक पर चलने वाली टॉय ट्रेन करना नहीं भूलते हैं। रेलवे ट्रैक पर सफर करना अपने आप में ही बेहद रोमांचकारी है यही वजह है कि सड़क और हवाई मार्ग से आने के बजाए पर्यटक शिमला आने के लिए ज्यादातर टॉय ट्रेन के सफ़र को प्राथमिकता देते हैं। रेलवे की ओर से भी पर्यटकों की रूचि को देखते हुए कई तरह की सुविधाएं रेलवे ट्रैक पर दी जा रही है जिससे कि यह हेरिटेज रेलवे ट्रैक अपनी पहचान को कायम रखें और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहे।
अगर बात इस रेलवे ट्रैक के सफर के रोमांच की की जाए तो यही एक खास वजह है कि पर्यटक कालका से शिमला तक का सफर इस ट्रैक करना पसंद करते हैं। यह ट्रैक एक नैरोगेज ट्रक है जिस पर सफर के दौरान 102 सुरंगों में से होकर गुजरती हैं। इसके साथ ही ट्रैक पर सैकड़ो घुमावदार मोड़ है जिन पर से गुजरती हुई ट्रेन प्रकृति के अलग ही नजारे पर्यटकों के आंखों के सामने पेश करती हैं। यह रेलवे ट्रैक टूरिस्ट के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा हैं। रोजाना हजारों पर्यटक प्रकृति के सुंदर नजारों का लुत्फ लेते इस पर सफर करते हैं।
102 पुल और 4 मंजिला स्टोन आर्च पुल और मनमोहक घाटियों से गुजरने वाला यह कालका-शिमला हेरीटेज ट्रैक टूरिस्ट को आकर्षित करता हैं। इस ट्रेक पर सात रेल गाड़िया प्रतिदिन चलती हैं। शिमला घुमने आने वाले ज्यादातर सैलानी कालका शिमला ट्रैक पर सफर करना ज्यादा पसदं करते हैं।
1903 में शुरू हुए कालका शिमला रेलवे ट्रेक की यह है ख़ास बात
9 नंवबर 1903 में इस रेल मार्ग की शुरूआत हुई थी। कालका-शिमला रेलवे ट्रैक का निर्माण कार्य 1898 में शुरू हुआ था। उस दौरान इसके निर्माण के लिए 86 लाख 78 हजार 500 रुपए बजट रखा गया था, लेकिन निर्माण पूरा होते वक्त यह बजट बढ़कर दोगुना हो गया। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी ब्रिटिश चीफ इंजीनियर एचएस हेरलींगटन को दी गई थी। 9 नवंबर 1903 को वायसराय लार्ड कर्जन ने इसकी शुरुआत की थी।
96 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक के 18 स्टेशन हैं खास
शिमला-कालका के 96 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर छोटे-बड़े करीब 18 रेलवे स्टॉपेज और स्टेशन हैं। ये कालका, टकसाल, गुम्मन, कोटी, सनावर, धर्मपुर, कुमारहट्टी, बड़ोग, सोलन, सलोगड़ा, कंडाघाट, कनाह, कैथलीघाट, शोघी, तारादेवी, जतोग, समरहिल और शिमला शामिल हैं। कालका से शुरु होने वाले इस विश्व धरोहर रेल मार्ग पहाड़ों और घुमावदार मोड़ों से पहाड़ों की रानी शिमला तक सैलानियों को पहुंचता हैं।
