नाहन : देवेंद्र कुमार – गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने पर गुजर्र समुदाय एवं हाटी समिति आमने सामने नजर आ रहे है । जहां एक ओर गुर्जर समुदाय अपने अधिकारों के हनन के आरोप लगा रहा है तो दूसरी और केंद्रीय हाटी समिति का कहना है कि उन्होंने कभी किसी के हक छीनने की चेष्टा नहीं की। उन्होंने लंबे समय से शांतिप्रिय तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी है ।
अपने अधिकारों के लिए लड़ने का सबको हक
नाहन में मीडिया से रूबरू हुए केंद्रीय हाटी समिति के उपाध्यक्ष सुरेंद्र हिंदुस्तानी ने सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि गुज्जर समुदाय बताएं कि हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा मिलने से किस तरह उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और गुज्जर समुदाय को मिलने वाला हक उन्होंने नहीं छीना है। उन्होंने बताया कि 1968 में उत्तराखंड के जौनसार बाबर को एसटी का दर्जा दिया गया था । उस समय भी क्षेत्र के हाटी समुदाय ने कोई भी उग्र आंदोलन न कर शांति बनाए रखी। उन्होंने कहा कि पिछले 55 सालों से हाटी समुदाय के लोग अपने अधिकारों अपने हकों के लिए शांति प्रिय तरीके से संघर्षरत हैं । उन्होंने किसी के हक मारने की चेष्टा न कभी की ओर न ही करेंगे औऱ अपने अधिकारों के लिए लड़ने का अधिकार सबको हैं ।
