By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Reading: प्राकृतिक खेती में मिसाल बना गांव हरनेड़…59 किसानों की लगभग 218 बीघा भूमि पर हो रही है प्राकृतिक खेती
Share
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Search
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
© 2022 Dawn News Network Pvt Ltd. | News Media Company | All Rights Reserved.
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > himachal > प्राकृतिक खेती में मिसाल बना गांव हरनेड़…59 किसानों की लगभग 218 बीघा भूमि पर हो रही है प्राकृतिक खेती
himachalNews

प्राकृतिक खेती में मिसाल बना गांव हरनेड़…59 किसानों की लगभग 218 बीघा भूमि पर हो रही है प्राकृतिक खेती

Chandrika
Chandrika 5 Min Read
Updated 2024/11/02 at 3:28 PM
Share

हमीरपुर,अरविन्द सिंह(TSN)-रासायनिक खाद के अंधाधुंध प्रयोग और अत्यंत जहरीले कीटनाशकों के छिड़काव से जहां हमारे खेत-खलिहानों, हवा और पानी में लगातार जहर घुल रहा है, वहीं यह जहर हमारे खान-पान तथा शरीर में भी प्रवेश कर रहा है। इससे हमारे शरीर और आसपास के वातावरण में कई गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। कैंसर और कई अन्य जानलेवा बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। यही नहीं, जमीन की उर्वरा भी प्रभावित हो रही है।

बता दे कि हमारे आम जनजीवन तथा पर्यावरण में इन सभी दुष्प्रभावों को देखते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है और प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को इसके लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित कर रही है। प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने सिर्फ अनुदान का ही प्रावधान नहीं किया है,बल्कि इस खेती से उगाई जाने वाली फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी घोषित किया है जोकि रासायनिक खेती से पैदा की गई फसलों के मुकाबले कहीं अधिक है।प्रदेश सरकार के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।हमीरपुर की ग्राम पंचायत बफड़ीं के गांव हरनेड़ के तो सभी किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया है और अब यह गांव एक आदर्श गांव के रूप में उभरने लगा है।

वहीं कृषि विभाग की आत्मा परियोजना हमीरपुर के परियोजना निदेशक डॉ. नितिन कुमार शर्मा ने बताया कि गांव हरनेड़ के सभी 62 किसान परिवारों की लगभग 264 बीघा भूमि को ‘प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना’ के तहत प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने के लिए शुरुआती चरण में 26 किसानों को 2-2 दिन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद गांव के प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण के लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर भी भेजा गया तथा उन्हें देसी नस्ल की गाय खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि अब गांव के 59 किसान परिवार लगभग 218 बीघा भूमि पर पूरी तरह प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अब वे हर सीजन में केवल एक-एक ही फसल उगाने के बजाय एक साथ कई फसलें उगा रहे हैं।

डॉ. नितिन कुमार शर्मा ने कहा कि गांव के प्रगतिशील किसान ललित कालिया ने बताया कि आतमा परियोजना के अधिकारियों की प्रेरणा से उन्होंने पालमपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया और सबसे पहले 4 कनाल जमीन पर प्राकृतिक खेती शुरू की। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी पूरी जमीन पर प्राकृतिक खेती ही कर रहे हैं तथा किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकलयुक्त कीटनाशक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह प्राकृतिक खेती के लिए बीजामृत, जीवामृत, द्रेकास्त्र, अग्निस्त्र और अन्य सामग्री स्वयं घर पर ही तैयार कर रहे हैं।

मोटा अनाज, दलहन, तिलहन और कई अन्य फसलें एक साथ उगा रहे हैं किसान

डॉ. नितिन कुमार शर्मा ने बताया कि खरीफ सीजन में वह मक्की के साथ-साथ कोदरा, मंढल और कौंगणी जैसे मोटे अनाज, दलहनी फसलें जैसे-कुल्थ, माश और रौंगी, तिलहनी फसल के रूप में तिल और कचालू, अरबी, अदरक तथा हल्दी उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में वह गेहूं के साथ सरसों, चना और मटर इत्यादि भी लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांववासी अब जहरमुक्त खेती के साथ-साथ कई ऐसे पौष्टिक मोटे अनाज व अन्य पारंपरिक फसलों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं जोकि लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थीं। उन्होंने कहा कि अब तो प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है जोकि सामान्य दामों से काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अभी खत्म हो रहे खरीफ सीजन की मक्की को गांव हरनेड़ के किसानों ने 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा, जबकि पहले मक्की को सामान्यत प्रति किलो 18 से 20 रुपये तक ही दाम मिलता था। उन्होंने कहा कि इस प्रकार, जिला हमीरपुर का यह छोटा सा गांव हरनेड़ प्राकृतिक खेती में एक आदर्श गांव बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन के कारण ही यह संभव हो पाया है।

TAGGED: Hamirpur natural farming
Chandrika November 2, 2024
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print
Previous Article हिमाचल में 123 साल में तीसरी बार अक्टूबर में सबसे कम हुई बारिश
Next Article हिमाचल में चुनावी गारंटियों की असफलता पर कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर फजीहत: राजेंद्र राणा
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category
  • Accident
  • Business /Employement
  • crime
  • education
  • election
  • festival
  • health
  • himachal
  • News
  • political
  • political
  • Religion
  • Sports
  • Uncategorized
  • weather
  • शख़्सियत

You Might Also Like

सुजानपुर में 11वीं के छात्र ने फंदा लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में शिक्षकों पर मारपीट के आरोप

Ago

चंबा में वीरभद्र सिंह जयंती पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बांटे फल और प्रसाद

Ago

दिशा बैठक में सांसद सुरेश कश्यप ने योजनाओं की समीक्षा की

Ago

डलहौजी नगर परिषद की नई अध्यक्षा वंदना चड्ढा ने संभाला कार्यभार

Ago

1058, Mall Enclave, DAYAL NAGAR,
Ludhiana, Punjab 141001

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?